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चंडीगढ़ के बेशकीमती फर्नीचर की लगातार हो रही है विदेशों में नीलामी

कहना गलत नहीं होगा कि हेरिटेज फर्नीचर का कारोबार करने वाले तस्कर एक-एक आइटम की कीमत अच्छे से समझते हैं.

चंडीगढ़ के बेशकीमती फर्नीचर की लगातार हो रही है विदेशों में नीलामी
स्कर, फर्नीचर चोरी करने में महिलाओं का सहारा लेते रहे हैं. 2016 में हेरिटेज फर्नीचर चोरी के कई मामलों में सेक्टर-25 कॉलोनी की महिलाएं पुलिस के हत्थे चढ़ी थीं.

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के निर्माता ली कार्बूजिए और उनके सहयोगी रहे पियरे जेनरे की ओर से तैयार हेरिटेज फर्नीचर लाखों करोड़ों में नीलाम हो रहा है. व्हीसल ब्लोअर एडवोकेट अजय जग्गा ने फर्नीचर की ऑक्शन रुकवाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह को उचित कदम उठाने की मांग की है. अजय जग्गा ने गृहमंत्री को लिखे पत्र में पेरिस में चंडीगढ़ की नीलाम हुई 5 विरासत फर्नीचर आइटम्स का हवाला देते हुए अपील की है कि नीलाम हो रहे बेशकीमती विरासत फर्नीचर को लेकर जांच की जाए. अजय जग्गा ने कहा चंडीगढ़ में मौजूद हेरीटेज फर्नीचर की अनदेखी हो रही उसके संरक्षण और संभाल की जरूरत है.

29 मई को पेरिस में कौन सा आइटम कितने में नीलाम हुआ.
आइटम                                       भारतीय रूपए      यूरो

बुक केस                                          5,05,300        6500

बैंच                                                 11,66,220      15000

ओकेशनल टेबल                               21,77,000      28000

एडवोकेट एंड प्रेस आर्म कुर्सियां            21,77,000    28000

चार कुर्सियां                                         6,22,000        8000

कुल                                                 66,47,520        85500

कहना गलत नहीं होगा कि हेरिटेज फर्नीचर का कारोबार करने वाले तस्कर एक-एक आइटम की कीमत अच्छे से समझते हैं. चंडीगढ़ के गटर पर लगे मेनहोल के ढक्कन तक तस्कर उड़ा ले गए हैं. सैकड़ों ढक्कनों में से अभी कुछ बचे हैं. इस ढक्कन पर चंडीगढ़ का मैप बना है. सेक्टर के साथ-साथ सुखना लेक तक का नक्शा आपको इस ढक्कन के जरिये समझ आ जाएगा. जिस कारण मेनहोल का ढक्कन विदेशों में नीलाम होता रहा है. ऑक्शन हाउस इसकी मोटी कीमत वसूलते रहे हैं. एडवोकेट अजय जग्गा ने बताया कि 2005 में मेनहोल का एक ढक्कन 10 लाख में नीलाम हुआ था.  

लाखों कोशिशों के बावजूद चंडीगढ़ की बेशकीमती विरासत विदेशों में नीलाम हो रही है. हालांकि चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने दावा किया कि 2011 में मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स द्वारा विरासत आइटम्स को बेचने और निर्यात पर पाबंदी लगाने के बाद किसी भी आइटम को न तो चंडीगढ़ से बाहर भेजा गया है, न बेचा गया है. यानि कि 2011 से पहले जिस हेरिटेज फर्नीचर को कबाड़ मानकर कौड़ियों के भाव बेच दिया गया था. वही अब विदेश में करोड़ों में नीलाम हो रहा है. 

मनोज परिदा ने कहा कि 2016 में हेरीटेज आइटम्स प्रोटेक्शन सेल बनाया गया जो लगातार हेरीटेज आइटम्स के संरक्षण को लेकर काम कर रहा है. मनोज परिदा के मुताबिक चंडीगढ़ में अभी भी 19000 से ज्यादा हैरीटेज फर्नीचर आइटम्स  मौजूद है. सभी आइटम्स को एक म्यूजियम में संभालकर प्रदर्शित करने को लेकर फिलहाल विचार विमर्श जारी है. 

एडवोकेट अजय जग्गा ने बताया कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर को संभालने के लिए इसके लिए विशेष म्यूजिमय बनाने की सलाह प्रशासन को दी थी. जिससे यह फर्नीचर उस म्यूजियम के माध्यम से संभाला जा सके. कल्चरल डिपार्टमेंट ने भी हेरिटेज फर्नीचर को आर्ट बताया था. बावजूद इसके यूटी प्रशासन कोई जरूरी कदम इसके लिए नहीं उठा पाया. हेरिटेज काउंसिल ने भी इस पूरे फर्नीचर की गणना के बाद इस पर सील लगाने की सलाह प्रशासन को दी थी. लेकिन यह कार्य भी नहीं हो सका.

उन्होंने कहा कि दुबई के हेरीटेज विलेज की तर्ज पर चंडीगढ़ हेरीटेज विलेज बनाया जा सकता है. अजय जग्गा ने कहा कि 30 करोड़ की कीमत का हेरीटेज फर्नीचर विदेशों में नीलाम हो चुका है. गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखने से पहले अजय जग्गा विदेश मंत्री से लेकर कल्चरल मिनिस्टर, सीबीआई और अन्य मंत्रालयों से अपील करते रहे हैं. बावजूद इसके हैरीटेज फर्नीचर की नीलामी का सिलसिला नहीं रूक रहा है. 

फर्नीचर के तस्कर
तस्कर, फर्नीचर चोरी करने में महिलाओं का सहारा लेते रहे हैं. 2016 में हेरिटेज फर्नीचर चोरी के कई मामलों में सेक्टर-25 कॉलोनी की महिलाएं पुलिस के हत्थे चढ़ी थीं. सेक्टर-19 स्थित ली कार्बूजिए सेंटर से 8 कुर्सी और एक टेबल चोरी हुआ था. इसमें पुलिस ने सेक्टर-25 की महिलाओं को गिरफ्तार कर फर्नीचर बरामद किया था. सेक्टर-10 गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज से फर्नीचर चोरी के मामले में भी यहीं की महिलाएं पकड़ी गई थीं.