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राजसमंद के इस आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे टपकती छत के नीचे बैठने को मजबूर, प्रशासन बेखबर

रधुनाथपुरा गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र में बारिश के दिनों में जब भी बच्चे बैठते है तो छतों से पानी टपकता है. 

राजसमंद के इस आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे टपकती छत के नीचे बैठने को मजबूर, प्रशासन बेखबर
पिछले साल से प्रांरभ हुए इस आंगनबाड़ी केंद्र की हालत शुरु से ऐसी ही है.

विनीता पालीवाल/राजसमंद: राजस्थान के राजमसंद ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाने के लिए बनाए गए आंगनबाडी केन्द्रों की सरकार कितनी बार तारीफ कर चुकी है. आकडें भी हमेशा बढ़-चढ़ कर दिखाए जाते है. लेकिन एक ऐसी आंगनबाड़ी केंन्द्र भी है जो सरकारी आंकडों और इन केंद्रों की तमाम सुविधाओं की पोल खोल रहा है. हम बात कर रहे राजस्थान के राजसमन्द जिले के देवगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के तहत रधुनाथपुरा गांव में संचालित मिनी आंगनबाडी केन्द्र की.
 
खबर के मुताबिक इस आंगनबाडी केन्द्र की स्थिति बेहद खस्ताहाल है. इस आंगनबाड़ी केन्द्र में बारिश के दिनों में जब भी बच्चे बैठते है तो छतों से पानी टपकता है. दीवारों में पानी की सीलन की बदबू आती है. ऐसे में यहां बच्चों की पढ़ाई तो दूर की बात यहां ठहराना भी मुश्किल होता है. हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खुद इसकों लेकर अपनी अर्जी लगा चुकी है लेकिन प्रशासन ने इनकी कोई सुनवाई नहीं की.
 
आंगनबाड़ी संचालिका के अनुसार पिछले साल से प्रांरभ हुए इस आंगनबाड़ी केंद्र की हालत शुरु से ऐसी ही है. इसको लेकर आंगनबाड़ी के कार्यकर्ताओं ने गांव के सरपंच साहिबा को प्रार्थनापत्र भी दिया. लेकिन इसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया. आंगनबाड़ी केंद्र की समस्या जस की तस बनी हुई है. यहां बच्चे न पढ़ाई कर सकते न ही खेल सकते है.

वहीं, गाव वालों की मानें तो वह अपने बच्चों को जबरदस्ती छोड़ जाते हैं. इस आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चे फर्श पर भरे पानी में बैठकर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं. कार्यकर्ता बार-बार पानी साफ करती रहती है. साथ ही, भवन के बाहर आसपास फैली हुई गंदगी के कारण बच्चों को मच्छर हमेशा घेरे रहते हैं. ऐसे में बच्चे न केवल शिक्षा के महत्वपूर्ण मिशन से वंचित हो रहे हैं बल्कि बीमार भी पड़ रहे हैं.  

आंगनबाड़ी की इस स्थिति को देखकर इतना तो साफ है कि सरकारी आंकडों के विपरीत यदि जिम्मेदार अपने कार्योलयों से बाहर निकल कर जमीनी हकीकत का मुआयना करते तो हालात ऐसे नहीं होते. अब देखने वाली बात ये होगी की प्रशासन को इस केंद्र की याद कब तक आएगी?