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चित्तौड़गढ़: झांतला माता मंदिर की महिमा है अपरंपार, होते हैं कई चमत्कार!

अधिकांश लोगों की मान्यता है कि लकवा रोगियों को मन्दिर परिसर में रात्रि विश्राम कराने के साथ ही समीपस्थ वटवृक्ष की परिक्रमा कराने से निश्चय ही लाभ होता है. 

चित्तौड़गढ़: झांतला माता मंदिर की महिमा है अपरंपार, होते हैं कई चमत्कार!

दीपक व्यास, चित्तौड़गढ़: आमतौर पर लकवा रोगी चिकित्सकों का सहारा लेकर अपनी बिमारी को दूर करने का प्रयास करते हैं लेकिन मेवाड़ के शक्तिपीठों में चित्तौड़गढ़ की झांतला माता ऐसा स्थान है जहां न केवल प्रदेश से बल्कि दूर दराज के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लकवा रोगी पहुंचकर रोग मुक्त हो जाते हैं. 

जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर झांतला माता का मंदिर स्थित है. जहां की मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से लकवा रोगी ठीक हो जाता है. वर्षों पुराने माता के मंदिर में इस तरह के चमत्कार की गाथा दूर-दूर तक फैली हुई है. जिसके चलते यहां वर्ष पर्यंत लकवा रोगियों की खासी तादाद देखने को मिलती है. खास तौर पर शारदीय और चैत्र नवरात्रि में हजारों लोग नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक माता के दरबार में श्रृद्धालु और लकवा रोगी यहां आकर स्वयं को धन्य होने की अनुभुति करते हैं.

अधिकांश लोगों की मान्यता है कि लकवा रोगियों को मन्दिर परिसर में रात्रि विश्राम कराने के साथ ही समीपस्थ वटवृक्ष की परिक्रमा कराने से निश्चय ही लाभ होता है. इसी भावना के अनुरूप बड़ी संख्या में लकवा रोगी और उनके परिजन इस नवरात्रि में भी झांतला रानी की शरण में रहते हैं.

कई श्रद्धालु रोगी मुक्ति के बाद मुर्गें का उतारा कर मन्दिर परिसर में उसे छोड़ देते हैं. वहीं कई भक्त यहां महाप्रसादी का आयोजन करते हैं. रोगियों के अलावा बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालु भी झांतला माता के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में नवरात्रि के दिनों में पहुंचे, जिसके फलस्वरूप यहां नवरात्रि मेले की भी अनुभुति रही.

आज के इस आधुनिक और वैज्ञानिक युग में जहां चिकित्सक लकवा रोगियों का उपचार करने में महिनों लगा देते है वहीं झांतला माता के दर्शन मात्र से लकवे का रोग दूर हो जाना एक चमत्कार ही कहा जा सकता है.