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अन्याय के खिलाफ मुहिम में सीएम गहलोत का मिला साथ, कहा- अनिवार्य रुप से दर्ज हो FIR

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok gehlot) ने अनिवार्य रुप से एफआईआर(FIR) दर्ज करने के आदेश दिए. 

अन्याय के खिलाफ मुहिम में सीएम गहलोत का मिला साथ, कहा- अनिवार्य रुप से दर्ज हो FIR
जांच में दोषी पाये जाने पर विभागीय कार्रवाई होगी. (फाइल फोटो)

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok gehlot) ने अनिवार्य रुप से एफआईआर(FIR) दर्ज करने के आदेश दिए. इसके अलावा थानों(Police Station) में मुकदमा दर्ज नहीं होने की स्थिति में एसपी कार्यालय(SP Office) में भी मुकदमा दर्ज कराने का अधिकार दिया गया. इन आदेशों के बाद भी जिन थानों में मुकदमे दर्ज नहीं किये गये. उन थानों के थाना प्रभारियों के खिलाफ अब पुलिस विभाग (Police Department) जल्द सख्त कार्रवाई करेगी.

प्रदेश के सीएम अशोक गहलोत ने अलवर के थानागाजी में विवाहिता के दुष्कर्म के मामले में थाने की ओर से की गयी लापरवाही के उजागर होने के बाद पुलिस विभाग को कुछ नये निर्देश जारी किये. इन निर्देशों के तहत थानों में एफआईआर दर्ज करना भी अनिवार्य किया गया. 

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गहलोत सरकार की ओर से कहा गया कि अगर थानों में कोई फरियादी का मुकदमा दर्ज नहीं होता है तो वह एसपी कार्यालय में भी एफआईआर दर्ज करा सकता है. लेकिन ऐसे में थानेदार की भूमिका की जांच की जायेगी. पुलिस मुख्यालय ने अब आदेश लागू होने से लेकर अब तक के मामलों का जांच करवायी है, जिसमें पुलिस की ओर से थानों में मुकदमे दर्ज नहीं किये गये.

सूत्रों के अनुसार, एडीजी अपराध बीएल सोनी के निर्देशन में ऐसे मामलों की जांच की गयी है. जिनमें फरियादी की ओर से एसपी कार्यालय में मुकदमे दर्ज हुए है. जांच में सामने आया कि जून से लेकर अब तक एसपी कार्यालय में फरियादियों की ओर से 63 मुकदमे दर्ज करवाये गये है. हालांकि इन मामलों की तह तक जांच की गयी तो सामने आया कि 63 में से 53 मामलों में तो परिवादी एफआईआर कराने सीधे ही एसपी कार्यालय में पहुंचे थे.

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मामलों की गंभीरता को देखकर जिला एसपी ने सीधे ही ये मामले दर्ज कर लिये. प्रदेश में इस दौरान के 10 मामले ऐसे सामने आए है, जब फरियादी पहले थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे थे. लेकिन जब एफआईआर दर्ज नहीं की गयी तो फिर परिवादियों ने एसपी कार्यालय में पहुंचकर मुकदमा दर्ज करवाया. 

एडीजी बीएल सोनी का कहना है कि इन 10 मामलों में थानेदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. इसके साथ ही जांच के लिए मामले विजिलेंस विभाग को भेज दिये गये है. जांच में दोषी पाये जाने पर विजिलेंस विभाग दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेगा.

सीएम के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने अब एफआईआर को लेकर सख्ती दिखाना शुरु कर दिया है. जो थानेदार फरियादी की ओर से दी गयी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नही करेंगे, उन पर अब गाज गिरना तय है. उम्मीद है कि एफआईआर आसानी से दर्ज होने से आमजन को प्रदेश में राहत मिलेगी. हालांकि इससे अपराध के आंकड़ो बढ़ेंगे. लेकिन वास्तव में आमजन की परेशानी को कम कर पुलिस के लिए विश्वास कायम किया जा सकेगा.

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