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राजस्थान: गरीबों के आशियाने पर महंगी पड़ी कलेक्टर्स की लापरवाही, नहीं मिली आवासों को मंजूरी

डिप्टी सीएम सचिन पायलट के निर्देश के बाद विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वर सिंह ने सभी कलेक्टर्स को चिट्टी लिखकर 15 नवंबर तक स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए हैं.

राजस्थान: गरीबों के आशियाने पर महंगी पड़ी कलेक्टर्स की लापरवाही, नहीं मिली आवासों को मंजूरी

जयपुर: प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 37 हजार से ज्यादा परिवार चार साल से अपने सपनों के आशियाने का इंतजार ही कर रहे हैं क्योंकि अब तक जिला कलेक्टर्स ने पात्र परिवारों को आवास योजना की स्वीकृतियां ही नहीं दी, जिसके बाद अब ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग एक्शन में आ गया है. 

डिप्टी सीएम सचिन पायलट के निर्देश के बाद विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वर सिंह ने सभी कलेक्टर्स को चिट्टी लिखकर 15 नवंबर तक स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए हैं. 2016 से लेकर 2018 तक 37,871 आवासों की स्वीकृतियां ही अभी तक जारी नहीं की गई है. इसके अलावा इस साल की हालत तो और भी बदत्तर है. 2019 में 67,305 परिवारों की आवासों की स्वीकृतियां ही नहीं मिल पाई है जबकि 30 सितंबर तक सभी जिलों से इन पात्र परिवारों को स्वीकृतियां मिल जानी चाहिए थी. अब नवंबर के आधे महीने में सभी स्वीकृतियां देनी जरूरी होगी.

इन 5 जिलों में कलेक्टर्स गरीबों पर पड़े भारी
पीएम आवास योजना में 2016 से 2018 तक के पात्र परिवारों को आवासों की स्वीकृति देने में वैसे तो सभी जिला कलेक्टर्स की लापरवाही रही लेकिन ये पांच जिले के कलेक्टर्स ऐसे हैं जिनकी लापरवाही सबसे ज्यादा रही. जिसमें सबसे आगे रहे डूंगरपुर कलेक्टर, जहां 4,848 आवासों की तीन साल से स्वीकृति ही नहीं मिली. इसके अलावा बाड़मेर में 3,651, टोंक में 3,431, करौली में 3,029, बूंदी में 2,466 परिवार अपने आवासों की अब तक इंतजार कर रहे हैं क्योंकि कलेक्टर साहब की लापरवाही के कारण समय से स्वीकृति ही नहीं मिल पाई.

2019 में इन जिलों के कलेक्टर्स पीछे रहे
2019 में कलेक्टर्स को मिले लक्ष्यों में डूंगरपुर ही सबसे पीछे रहा. इस साल डूंगरपुर में 10,894, जोधपुर में 6,666, बांसवाडा में 3,907, बाड़मेर में 3,281, सवाई माधोपुर में 3,433 परिवारों की स्वीकृति ही नहीं मिली है.  

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश्वर सिंह ने निर्देश देते हुए कहा है प्रतिदिन कलक्टर्स को 2094 आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया था.खेद जताते हुए राजेश्वर सिंह ने कहा कि 15 नवबंर तक इस साल के सभी लक्ष्य पूरे किए जाए. ऐसे में अब देखना यह होगा कि पंचायतीराज विभाग के आदेशों की पालना कितने जिला कलेक्टर्स कर पाते हैं या फिर से विभाग के आदेशों की धज्जियां उडती हुई दिखाई देगी.