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झुंझुनूं: शहीद असलम खान को बिसाऊ में दी गई श्रद्धांजलि, स्मारक बनाने की हुई मांग

इस मौके पर यूथ लीडर इस्माइल तंवर, सिराज खान के नेतृत्व में जुटे युवाओं ने जिला कलेक्टर के नाम एसएचओ मीणा को पत्र देकर राणासर की राजकीय स्कूल का नाम शहीद असलम खां के नाम से करने और स्मृति में स्मारक बनवाने की मांग की.

झुंझुनूं: शहीद असलम खान को बिसाऊ में दी गई श्रद्धांजलि, स्मारक बनाने की हुई मांग
असलम खान सेना की 24 राष्ट्रीय रायफल में बतौर हवलदार तैनात थे.(फाइल फोटो)

झुंझुनूं: कश्मीर के दादरवाल में सर्च ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए गांव राणासर के असलम खां को बिसाऊ के गांधी चौक में श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान एसएचओ रामपाल मीणा और युवाओं ने शहीद के चित्र के समक्ष कैंडल जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए.

इस मौके पर यूथ लीडर इस्माइल तंवर, सिराज खान के नेतृत्व में जुटे युवाओं ने जिला कलेक्टर के नाम एसएचओ मीणा को पत्र देकर राणासर की राजकीय स्कूल का नाम शहीद असलम खां के नाम से करने और स्मृति में स्मारक बनवाने की मांग की. इस मौके पर मकसूद अली, सलीम खां सहित काफी युवाओं ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद की आत्मा की शांति की प्रार्थना भी की.

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आपको बता दें कि बीते 7 सितंबर को राजस्थान के सपूत असलम खान देश की सेवा करते हुए कश्मीर में शहीद हो गए थे. अमरनाथ से 40 किमी दूर दादरवाल में रात्रि सर्च ऑपरेशन करने के दौरान उन्होंने देश के लिए सहादत दी. 40 वर्षीय असलम खान सेना की 24 राष्ट्रीय रायफल में बतौर हवलदार पिछले 2 साल से जम्मू-कश्मीर में तैनात थे. जहां श्रीनगर क्षेत्र में उनकी पोस्टिंग थी.

गौरतलब हो कि सितंबर महीने में ही अजमेर के लाल हेमराज जाट ने भी देश के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दी. हेमराज अजमेर जिले के भदूण गांव के रहने वाले थे. वे कश्मीर के पूंछ में तैनात थे. शहीद हेमराज सेना की 4 ग्रेनेडियर बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे. वे करीब ढाई साल पहले ही सेना में भर्ती हुए थे. हेमराम ने महज 23 साल की उम्र में देश के लिए अपनी जान दी.