नागपुर में पकड़ा गया जाली नोटों का जखीरा, इनकी छपाई भी बिल्‍कुल असली नोटों जैसी

डीआरआई इस मामले को अंतरराष्ट्रीय गिरोह के जरिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में जाली नोट फैलाने वाले गिरोह तक पहुंचने का अहम सुराग मान रहा है.

नागपुर में पकड़ा गया जाली नोटों का जखीरा, इनकी छपाई भी बिल्‍कुल असली नोटों जैसी

नई दिल्‍ली/मुंबई : तीन राज्यों की जांच एजेंसियों के खुफिया जानकारी के आधार पर मुंबई डीआरआई (Mumbai DRI) ने नागपुर (Nagpur) से 28 लाख 75 हजार के जाली नोट पकड़े हैं. बुधवार को DRI ने बांग्‍लादेश में छपे 1577 जाली नोट पकड़े हैं. इन जाली नोटों में 386 नोट 2000 रुपये तो 1191 नोट 500 रुपये के थे. इस मामले में DRI ने लालू खान को गिरफ्तार किया है. डीआरआई इस मामले को अंतरराष्ट्रीय गिरोह के जरिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में जाली नोट फैलाने वाले गिरोह तक पहुंचने का अहम सुराग मान रहा है.

जाली नोटों को भारत में लाने के रास्ते पर नजर 
हालांकि 18.75 लाख रुपये के नोट, जिनकी छपाई बेहद उम्‍दा किस्म की देखी जा रही है, उसे भारतीय सीमा में बांग्‍लादेश (Bangladesh) के रास्ते पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर में डिलीवरी के लिए लाया गया था. इसके अलावा गुजरात और नेपाल के रास्ते पर डीआरआई ने नजर बना रखी है. नेपाल के रास्ते भारत में जाली नोटों को भेजने के कई मामले सामने आ चुके हैं.

डीआरआई के सूत्रों के मुताबिक, "अंडरवर्ल्ड अपने ठिकाने बदल-बदलकर भारत में नकली नोट फैलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जांच एजेंसियों की कड़ाई के चलते अंडरवर्ल्ड की कोशिशों पर पानी फिर रहा है.

तीन और मामले पहले भी हो चुके हैं...
1. मुंबई में जाली नोटों को पकड़ने की 3 और मामलों को डीआरआई अंजाम दे चुकी है. साल 2017 के अगस्त महीने में मुंबई के समीप मुंब्रा से 6 लाख 58 हजार रुपये अपराधी ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌के साथ पकड़े थे.
2. साल 2017 के ही सितंबर महीने में नवी मुंबई के सानवाड़ा इलाके से 7 लाख 36 हजार के नोटों के साथ आरोपी को साथ प्रवर्तन निदेशालय ने धर दबोचा था.
3. तीसरी घटना, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय को कामयाबी मिली थी, वह थी साल 2017 के अक्टुबर महीने में... जहां मुंबई के बांद्रा इलाके से चार लोगों को 20 लाख 57 हजार के जाली नोटों के साथ पकड़ा गया था.

स्थानीय पुलिस के जरिए आर्थिक राजधानी मुंबई में जाली नोटों के कई मामलों में अपराधी सहित नोटों का जखीरा पकड़ा गया है. इस मामले में डीआरआई ने नासिक और मध्यप्रदेश की भारत सरकार की प्रिंटिंग प्रेस से जाली नोटों के बारे में तकनीकी सहायता ली, जिसके बाद जाली नोटों का छपाई और गुणवत्ता के बारे में स्पष्ट हुई कि ये अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के जरिए अंजाम दिए गए हैं.

कमीशन पर काम करते हैं डिलीवरी एजेंट
तकरीबन 15 से 20 प्रतिशत के कमीशन पर कई एजेंट इन जाली नोटों के डिलीवरी ब्यॉय की तर्ज पर काम करते हैं. नोट बाजार तक पहुंचाने वाले तकरीबन 30 से 40 फीसदी का मार्जिन लेते हैं. 100 रुपये के नोट के लिए कीमत महज 60 से 55 रुपये ही देनी होती है. इसमें कड़ी के तौर पर कई लोग जुड़े होते हैं. इसी तलाश के दौरान अभी डीआरआई इस गिरोह के सरगना तक नहीं पहुंच सका है, लेकिन ताजा मामले में नागपुर से गिरफ्तार व्यक्ति से मिली जानकारियों के आधार पर नोटों को भारत में भेजने के लिए बांग्‍लादेश का रास्‍ता अख्तियार किया गया. नागपुर कोर्ट ने हिदायत दी कि इस मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को दिया जाए. 

 

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