कोरोना: भारत का नंबर वन लेदर शूज मैन्युफैक्चरिंग हब खादी पर होगा शिफ्ट

आगरा का जूता कारोबार मजदूरों की कमी और विदेशी ऑडर रद्द होने के कारण ढहने लगा है. 

कोरोना: भारत का नंबर वन लेदर शूज मैन्युफैक्चरिंग हब खादी पर होगा शिफ्ट
फोटो साभार-इंटरनेट

आगरा: कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के कारोबार पर कहर बरपाने ​​के साथ ही आगरा (Agra) के जूता कारोबारियों ने अब नए उत्पादों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है. मजदूरों की कमी और विदेशी ऑडर रद्द होने के चलते आगरा का जूता कारोबार ढहने लगा है. कारोबारियों के अनुसार महामारी ने श्रम प्रधान उद्योग की खुशी और अर्थव्यवस्था को लूट लिया है. जिससे निजात पाने के लिए उन्होंने बदलाव का ये फैसला लिया है.

उन्होंने बताया कि कुछ निर्माता कारोबारियों ने अब खादी के जूते पर काम करना शुरू कर दिया है जो कई तरीकों से गेम चेंजर साबित हो सकता है. राष्ट्रीय खादी आयोग की पहल पर, चमड़े या अन्य सिंथेटिक सामग्री के बजाय कच्चे माल के रूप में खादी का उपयोग करके जूते डिजाइन किए जा रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आत्मानिर्भरता' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील पर उन्होंने इसकी शुरुआत की है. 

आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष पूरन डावर के बताया कि कुछ कारोबारियों ने खादी जूतों के सैंपल केंद्रीय प्राधिकरण को भेजे हैं. प्राधिकरण से ग्रीन-सिग्नल मिलते ही इसका बड़ी मात्रा में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि खादी के जूते स्वाभाविक रूप से अधिक रंगीन, सुंदर और सस्ते होंगे.

आगरा को भारत का नंबर वन लेदर शूज मैन्युफैक्चरिंग हब माना जाता है. मीडिया से बातचीत में डावर ने कहा कि 5,000 वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबार को सरकार से बड़े पैमाने पर समर्थन की आवश्यकता है, खासकर क्योंकि यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शहर में चार लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती है. उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में महामारी के कारण बड़ी संख्या में जूतों के ऑडर रद्द कर दिए गए हैं. जिसके पूरा करने के लिए कच्चा माल पहले ही खरीदा जा चुका था. उन्होंने कहा कि लगभग 30 प्रतिशत उत्पादन भारी छूट पर विदेशी ग्राहकों तक पहुंच सकता है. लेकिन एक प्रमुख नीति ओवरहाल और वित्तीय सहायता का इंजेक्शन समय की आवश्यकता है.

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वहीं डावर ने क्लस्टर-केंद्रित शिक्षा का सुझाव दिया जो एमएसएमई को कक्षाओं को टूल रूम में बदलने में मदद करेगा. डावर के अनुसार हाई स्कूल स्तर तक के छात्रों को बुनियादी कौशल हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जो उन्हें जीवन व्यतित करने में मदद करेगा. बताते चलें कि आगरा चमड़े के जूते और हस्तशिल्प वस्तुओं का एक प्रमुख उत्पादक है, जिसमें संगमरमर का जड़ने का काम विशेष रूप से किया जाता है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बुद्धिजीवियों ने आगरा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इन क्षेत्रों के लिए एकीकृत पाठ्यक्रमों की सिफारिश की है.

आगरा विकास फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने कहा कि आगरा शहर कांच के बने पदार्थ, चमड़े के जूते, पेठा बनाने, लोहे की ढलाई का उत्पादन करने में मशहूर रहा है, इसी के चलते 1970 के दशक के प्रारंभ में हरित क्रांति में कृषि औजार, पाइप, डीजल जनरेटर और पंपों की कास्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हालांकि इन उद्योगों के लिए एक भी कच्चा माल स्थानीय रूप से उपलब्ध नहीं था, लेकिन कुशल मेनपावर के बल पर, आगरा कांच के सामानों के प्रचार में लीडिंग और प्रमुख खिलाड़ी था. उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद में चूड़ियां जो 1990 के दशक तक आगरा जिले का हिस्सा थीं और लोहे के उत्पादों के साथ-साथ चमड़े के जूतों के उद्योग को भी शामिल करती थीं. जैन ने कहा कि इन विशेष क्षेत्रों से उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान केंद्र खोलने की जरूरत है.

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