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बारां: भारी बारिश के कारण तबाह हुई खेतों में खड़ी फसल, किसान बेहाल

महात्मा ज्योतिबा फूले संस्थान अन्ता व किसान संघ ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार से मांग की है. किसान संघ ने कहा है कि किसानों के नुकसान का व्यापक सर्वे करवा शीघ्र मुआवजा दिलवाया जाए. 

बारां: भारी बारिश के कारण तबाह हुई खेतों में खड़ी फसल, किसान बेहाल
भारी बरसात से जिलें भर की खरीब की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई.

राम मेहता/बारां:  राजस्थान के बारां जिला सहित अन्ता क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण सोयाबीन, धान, उड़द, मूंग, मक्का की फसलें पूर्ण रूप से तबाह होने के कगार पर पहुंच चुकी है. जिसके चलते किसान के सामने जीवन यापन का संकट पैदा हो गया है. वहीं, महात्मा ज्योतिबा फूले संस्थान अन्ता व किसान संघ ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार से मांग की है. किसान संघ ने कहा है कि किसानों के नुकसान का व्यापक सर्वे करवा शीघ्र मुआवजा दिलवाया जाए. 

किसान सत्यनारायण मेहरा, अशोक मालव, केसरी लाल मेरोठा तथा गोपाल लाल सैनी ने बताया कि अतिवृष्टि के चलते किसानों का भारी नुकसान हुआ है. सीजन की जिन्सों के साथ-साथ फल व सब्जी की फसल भी नष्ट हो गई है. ऐसे में किसान के खेत को ही इकाई मान कर नुकसान का मुआवजा शीघ्र दिया जाए. ताकि आने वाली फसल में किसान को सम्बल मिल सके. राज्य सरकार से किसानों को नुकसान का मुआवजा राशि शीघ्र दिलवाने की मांग की है.

वहीं, भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी का कहना है की इस बर्ष हुई भारी बारिश  से जिलें भर की खरीब की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई. ऐसें में किसानों को फसल खराब का पूरा मुआवजा दिया जाए. साथ ही किसानों को रबी की फसल के लिए भी राज्य सरकार को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए. 

बता दें कि मुसलाधार बारिश  ने प्रदेश के कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया है. कोटा संभाग के हाड़ौती में ही हुई भारी बारिश के चलते करीब 10 हज़ार करोड़ की फसलें तबाह हो गई है. जिनमें धान, सोयाबीन, और उड़द, ज्वार, मक्का की फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है. ज़्यादातर इलाकों मे 80 से 100 फीसदी तक फसल खराब हो चुकी है. 

कोटा संभाग के संयुक्त कृषि निदेशक रामवतार शर्मा के मुताबिक 11 लाख 58 हज़ार हैक्टेयर में बुवाई हुई जसमे 6 लाख 87 हज़ार हैक्टेयर में सोयाबीन की फ़सल 2 लाख 8 हज़ार हैक्टेयर में उड़द की बुबाई हुई 99 हज़ार हैक्टेयर में मक्का की बुवाई हुई. जबकि 95 हज़ार हैक्टेयर मे धान की बुवाई हुई है, जिसमें से 5 लाख 78 हज़ार हैक्टेयर की फसल खराब हो गई.