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राजस्थान की सियासत के बीच फिर 'पंचर' हुई स्टूडेंट्स की साइकिल, निरस्त हुआ टेंडर

पिछली सरकार ने साइकिलों के 4 बार टेंडर निकाले, लेकिन कोई कंपनी आवेदन करने ही नहीं आई.

राजस्थान की सियासत के बीच फिर 'पंचर' हुई स्टूडेंट्स की साइकिल, निरस्त हुआ टेंडर
सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने एक भी साइकिल नहीं बांटी.

जयपुर: राजस्थान में सत्ता बदलने के साथ सियासी साइकिल का रंग बदल रहा है, लेकिन अब लगता है कि सरकारी साइकिलों में सियासी जंग भी लग चुकी है. तीन साल पहले बीजेपी सरकार में सरकारी छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं को निशुल्क साइकिल बांटने की घोषणा की थी. उसके बाद प्रदेश की सत्ता बदल गई और साइकिल सियासत का शिकार हो गई. वहीं, सत्ता बदलने के बाद भी छात्र छात्राओं को अब तक साइकिले बंट ही नहीं पाई. 

राजस्थान में सत्ता बदलते ही छात्रों के साइकिलों के पहियों पर छात्रावासों तक पहुंचते-पहुंचते ब्रेक लग जाते है. अब तो ऐसा लगता है जैसे इन सियासी साइकिलों रंग बदलने के साथ साथ बुरी तरह से जंग भी लग चुकी है. तीन साल से छात्रावासों में रहने वाले हजारों छात्र छात्राए साइकिल का इतंजार ही करते रह गए. लेकिन सियासी साइकिल है कि अपना रंग दिखाना बंद ही नहीं करती. हां इतना जरूर है कि सत्ता बदलने के साथ साथ सियासी साइकिल अपना रंग जरूर बदल लेती है. कभी काले से भगवा तो कभी भगवा से काला रंग हो जाता है. लेकिन इन्ही सियासी घोषणाओं के बीच आज तक भगवा-काली साइकिलों का तोहफा छात्र छात्राओं को नसीब ही नहीं हो पाया.

छात्रावासा में रहने वाले पात्र छात्रों के मुताबिक सरकार से गुजारिश करते है कि जल्द से जल्द साइकिले मिले क्योंकि किसी का तीन किलोमीटर किसी का स्कूल उससे भी ज्यादा दूरी पर है. ऐसे में समय बबार्द तो होता ही है, इसके साथ साथ गर्मी में परेशानियां भी बढ जाती है. दरअसल, बीजेपी सरकार में तत्तकालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 8 मार्च 2017 के बजट घोषणा में छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं के लिए साइकिले बांटने का ऐलान किया था. इसमें शर्तें ये रखी गई थी कि दो किलोमीटर की दूरी पर स्कूल या शिक्षण संस्थान जाने वाले स्टूडेंट्स को निशुल्क साइकिल वितरित की जाएगी. लेकिन सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने एक भी साइकिल नहीं बांटी.

वहीं, पिछली सरकार ने साइकिलों के 4 बार टेंडर निकाले, लेकिन कोई कंपनी आवेदन करने ही नहीं आई. अब सत्ता कांग्रेस की आई तो इन्होंने भी साइकिलें बांटने का ऐलान किया, लेकिन 9 महीने बाद भी साइकिले बंट नहीं पाई. कांग्रेस सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने एक बार और टेंडर निकाला, लेकिन इस बार भी साइकिल के लिए किसी कंपनी ने आवेदन ही नहीं किए, जिसके बाद टेंडर को फिर से निरस्त करना पड़ा.

वहीं, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के मुताबकि आजकल साइकिलों का जमाना रहा नहीं, लेकिन फिर भी फिर से टेंडर निकालकर साइकिलें बांटेंगे. खबर के मुताबिक भारी भरकम शर्तों की वजह से कोई भी कंपनी साइकिल का टेंडर नहीं कर पाई. साइकिल के टेंडर के लिए कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ होना आवश्यक था. जिसमें प्रति साइकिल की लागत 3600 से 4000 रूपए तक आंकी गई थी. लेकिन अब सरकार टर्नओवर कम करने के साथ साथ नियमों को भी सरल करने जा रही है. समाजिक न्याय अधिकारिता के अधीन 756 सरकारी छात्रावास है. इनमें से 233 हॉस्टल ऐसे चिंहित किए गए है, जिनमें रहने वाले करीब 10 हजार स्टूडेंट्स ऐसे है,जिन्हे दो किलोमीटर या इससे अधिक दूरी तय कर स्कूल जाना पड़ता है.