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दौसा: मृत लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर NGO ने कमाया लाभ, आरटीआई समूह ने किया दावा

आरटीआई कार्यकर्ता समूह ने आरोप लगाए कि संस्थान ने 2013 में मर चुके लोगों को पदाधिकारी बनाकर उनके नाम पर संस्था को चलाया, 79 लाख रुपये की बैलेंस सीट बनाई.

दौसा: मृत लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर NGO ने कमाया लाभ, आरटीआई समूह ने किया दावा
आरटीआई कार्यकर्ता मांग कर रहे है कि ऐसी संस्था पर कार्यवाही होनी चाहिए.

लक्ष्मी अवतार/दौसा: राजस्थान के दौसा में एनजीओ की आड़ में फर्जीवाड़ा करने, मृत लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर संस्था चला कर लाभ कमाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा  है. इसी कड़ी में जयपुर के आरटीआई समूह ने दौसा पहुंच कर प्रेसवार्ता कर फर्जीवाड़े का दावा किया. वहीं, दूसरी ओर आरोपित पक्ष ने भी सामने आकर आरटीआई कार्यकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाए. साथ ही उन्होने कहा कि ये संस्था की सम्पत्ति को हड़पने का स्टंट है, जिस पर फर्जीवाड़े का दावा करने वाले लोगों ने कब्जा किया हुआ है.

दौसा में सहकारी समिति से पंजीयन एनजीओ रधुकुल शिक्षण संस्थान में बड़ी धांधली होने का दावा किया. आरटीआई कार्यकर्ता समूह ने आरोप लगाए कि इस संस्थान ने 2013 में मर चुके लोगों को पदाधिकारी बनाकर उनके नाम पर संस्था को चलाया, 79 लाख रुपये की बैलेंस सीट बनाई. आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार मीणा ने यह भी कहा कि इसमें गंगाधर मीणा को भी पदाधिकारी बना कर रखा जबकि गंगाधर दावा कर रहे है कि वे कभी पदाधिकारी ही नहीं रहे. आरटीआई कार्यकर्ता मांग कर रहे है कि ऐसी संस्था पर कार्यवाही होनी चाहिए.

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इस संस्था में बडे घपले हुए है और इसे उजागर करना उन का फर्ज है. जबकि प्रेसवार्ता के बाद दूसरे पक्ष ने भी आरटीआई कार्यकर्ता की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए. वर्तमान में रघुकुल शिक्षण संस्था के पदाधिकारी मंत्री रजनीश शर्मा ने दावा किया कि संस्था में जिस घपले का जिक्र किया जा रहा है वो खुद आरटीआई कार्यकर्ता गंगाधर के अध्यक्षीय कार्यकाल में ही हुआ इसलिए वह दावा कर रहे है कि वे संस्था के कभी पदाधिकारी ही नहीं रहे. जबकि संस्था द्वारा खरीदी गई भूमि की रजिस्ट्री गंगाधर मीणा के नाम है जिस की उन्होनें लीज डीड भी करवाई है जो कि झूठी नहीं हो सकती. 

 

साथ ही आरोप लगाए कि जिस 79 लाख का जिक्र किया जा रहा है उस भूमि व भवन पर भी उन्होने कब्जा कर रखा है. जिस की पुलिस थानों में तीन एफआईआर दर्ज है. पूरा विवाद उसी सम्पत्ति को लेकर है जिसे गंगाधर मीणा हथियना चाहते है. गंगाधर मीणा ने अपने जीजा के साथ मिलकर संस्था में चोरी भी करवायी थी, जिसकी तीन एफआईआर दौसा के सदर थाने में दर्ज है. जिसकी जांच अंतिम चरण में है और उसमें पुलिस जल्द ही चालन पेश करने वाली है.

बता दें कि रघुकुल शिक्षण संस्था में बटवारे का विवाद इस स्थिति में पहुंच गया है कि दोनों पक्ष एक दूसरे की शिकायतें कर रहे है. प्रकरण पुलिस थाने में भी दर्ज हो चुके हैं. शिकायत के आधार पर उप रजिस्ट्रार दौसा की ओर से जांच की गई. इस जांच रिपोर्ट से ये तो साफ है कि इस संस्था में मृत पदाधिकारियों के नाम का दुरूपयोग किया गया. फर्जी हस्ताक्षर से चुनाव समपन्न हुए व कार्यवाही अंकित की गई. लेकिन जांच का विषय ये भी है कि ये फर्जीवाडे किन पदाधिकारियों के द्वारा किए गए. अब इन पर क्या कार्यवाही की जाए. 

वहीं, जब इस प्रकरण को लेकर दौसा सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार सुरेन्द्र शर्मा से बात की तो उनका कहना है कि आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा जयपुर रजिस्ट्रार को रघुकुल शिक्षण संस्था में मृत लोगो को पदाधिकारी बनाकर संस्था को चलाने और फर्जीवाड़े की शिकायत की थी. जिसकी जांच के निर्देश जयपुर रजिस्ट्रार द्वारा मुझे दिये गए थे. जिसकी जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट उनको भेज दी गयी है. जांच में मृत लोग संस्था में पदाधिकारी पाए गए हैं. अब जयपुर रजिस्ट्रार के निर्देश मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी.

बहरहाल, इस संस्था में उपजे विवाद और जांच रिपोर्ट के बाद यह तो साफ हो गया है कि एनजीओ जो बिना लाभ कमाए सामाजिक कार्य के लिए पंजीकृत की जाती है वह आज फर्जीवाड़े व बेहतहाशा आय कमाने का जरिया बन गई है.