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डेंगू के वायरस ने बदला ट्रेंड ,हाड़ौती में मिले "एक्सपेंडेड डेंगू" के रोगी

इनमें लीवर व रक्ततंत्र अधिक प्रभावित हो रहा है,रक्त कणिकाएं विशेषकर श्वेत रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स की संख्या अत्यधिक रुप से कम देखने को मिल रही है खास बात यह है कि प्लेट्लेटस की संख्या दस हजार या इससे कम होने पर भी रक्त स्त्राव के लक्षण नहीं है.

डेंगू के वायरस ने बदला ट्रेंड ,हाड़ौती में मिले "एक्सपेंडेड डेंगू" के रोगी
हाड़ौती में अधिकांश रोगी या तो साधारण डेंगू के थे या एक्सपेंडेड सिंड्रोम के है.

हिमांशु मित्तल,कोटा:चिकित्सा विभाग(medical department) की लाख कोशिशों के बावजूद डेंगू (dengue)का कहर कम होने का नाम नही ले रहा है. इस साल डेंगू के रोगियों की संख्या यह बताती है कि डेंगू के फैलाव को रोक पाने में हम अक्षम रहे है,यानि मच्छर पर नियंत्रण (Mosquito control)करना अब शासन प्रशासन के वश में रहा नहीं रहा है हालांकि इस बीच राहत की बात यह है कि इतने अधिक रोगी होने के बावजूद मृत्यु दर पहले की तुलना में कम है.और इससे स्पष्ट है कि इस बार डेंगू का वायरस(Dengue virus) कम घातक है.पिछले साल डेंगू के मरीजों में तीन तरह के लक्षण दिखाई दिए थे. इनमें साधारण डेंगू, डेंगू हीमोरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम था,लेकिन इस बार डेंगू के वायरस ने अपना ट्रेड बदला है. इसके चलते नई श्रेणी के मरीज देखने में आ रहे है। इस बार इसे "एक्सपेंडेड डेंगू"(Expended dengue) सिंड्रोम नाम दिया गया हाड़ौती में अधिकांश रोगी या तो साधारण डेंगू के थे या एक्सपेंडेड सिंड्रोम के है. इस सिड्रोम में इनमें लीवर व रक्ततंत्र अधिक प्रभावित हो रहा है.इसमें रक्त कणिकाओं विशेषकर श्वेत रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स की संख्या अत्यधिक रुप से कम देखने को मिल रही है.विशेष बात यह है कि प्लेट्लेटस की संख्या दस हजार या इससे कम होने पर भी रक्त स्त्राव के लक्षण नहीं है.

जानकारी के मुताबिक कोटा में आई बाढ़ के बाद ड़ेंगू का वायरस तेजी से सक्रिय हुआ हालांकि चिकित्सा विभाग ने युद्ध स्तर पर अभियान भी छेड़ा ,लेकिन ड़ेंगू का असर कम नहीं हुआ.बात करे सितम्बर माह की तो सितम्बर माह में 137 ड़ेंगू रोगी पॉजिटिव मिले थे.अक्टूबर के शुरुआत में ड़ेंगू के डंक ने असर दिखाना शुरू किया तो अस्पतालों में मरीजो की संख्या में एका-एक इजाफा हो गया.डेंगू पॉजिटिव का आंकड़ा केवल अक्टूबर माह में ही 400 के पार हो गया.ये आंकड़ा वो है जो एलाइजा से पॉजिटिव आये है. इसके अलावा कार्ड टेस्ट से ड़ेंगू पॉजिटिव आये मरीज से शहर के निजी अस्पताल भरे पड़े है। हालात यह है कि शहर की एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों में बेकाबू ड़ेंगू ने कोहराम मचा रखा है। रोजाना डेंगू के बड़ी तादाद में मरीज सामने आ रहे है.सेन्ट्रल लैब ने जनवरी से 23 अक्टूबर तक के जो आकड़े दिए है उसके मुताबिक कोटा शहर में डेंगू रोगियों की संख्या 550 से ज्यादा है वही कोटा जिले में आकड़ा 600 के पार पहुंच चुका है जबकि पूरे कोटा संभाग का आकड़ा देखे तो संख्या 802 के करीब पहुंच चुकी है .

मेडिकल कॉलेज कोटा के डॉ मनोज सालूजा का कहना है कि बुखार आने पर उसे हल्के में ना ले और तुरंत चिकित्सक की सलाह ले साथ ही शरीर में जल,और लवण की मात्रा बनाएं रखने के लिए तरल पदार्थ का अत्यधिक सेवन करें.कोशिश करें कि पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं ताकि शरीर में कैलोरी की कमी ना हो इसके अलावा पूरी आस्तीन के कपड़े पहने और शरीर को ढक कर रखे ताकि मच्छर ना काटने पाएं.