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राजस्थान हाउस में फर्जीवाड़े की खुली पोल, सरकार को लग रहा था लंबे समय से चुना

राजस्थान हाउस (Rajasthan House)में एक सीबीआई जांच (CBI Investigation)से बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है.

राजस्थान हाउस में फर्जीवाड़े की खुली पोल, सरकार को लग रहा था लंबे समय से चुना
राजधानी दिल्ली के पृथ्वीराज रोड पर स्थित राजस्थान हाउस. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: राजस्थान हाउस (Rajasthan House)में एक सीबीआई जांच (CBI Investigation)से बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की एक कार्रवाई से पूरे खेल की पोल खुल गई है. 

आपको बता दें कि सीबीआई ने कुछ दिनों पहले एक वांटेड अपराधी को दिल्ली रेलवे स्टेशन (Delhi Railway Station)से गिरफ्तार किया था. उसके पास से राजस्थान हाउस के कमरा नंबर 506 की चाबी मिली. गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई उसे राजस्थान हाउस ले गई औऱ उस रुम में पहले से ठहरे हुए लोगों के सामान की जांच में कुछ नहीं मिला तो सीबीआई उसे गिरफ्तार कर ले गई. साथ ही इस जांच के बाद राजस्थान हाउस में चल रहे कई अन्य कारनामों का खुलासा हो गया.

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके में हैं राजस्थान हाउस
राजस्थान हाउस दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में पृथ्वीराज रोड पर स्थित है. इस हाउस में राजस्थान के मुख्यमंत्री, मंत्री, चीफ सेक्रेटरी सहित अधिकारी, विधायक सांसद रुकते है. पिछले दिनों एक घटी एक घटना से राजस्थान हाउस के सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खुल गई. आलम यह है कि इस राजस्थान हाउस प्रशासन की ओर से बरती जा रही भारी लापरवाही के कारण सीबीआई के वांटेड तक भी रुकने लगे. यह खुलासा 12 सितंबर को सीबीआई की एक जांच में सामने आया.

फर्जी तरीके से रुका था गिरफ्तार अपराधी
दरअसल, सीबीआई ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से अलवर के रहने वाले दिनेश खंडेलवाल को गिरफ्तार किया. उसकी जेब में राजस्थान हाउस के कमरा नंबर 506 की चाबी मिली. सीबीआई दिनेश खंडेलवाल को गिरफ्तार कर राजस्थान हाउस में जांच के लिए पहुंची तो पाया कि फर्जी एंट्री के नाम पर 506 मे रुका हुआ था. हालांकि सीबीआई जांच में कमरे में कुछ संदिग्ध नहीं मिला. 

मामला सामने आने पर मैनेजर ने फंसाई कर्मचारी गर्दन
मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने राजस्थान हाउस के कागजात खंगाले तो पता चला कि दिनेश खंडेलवाल नाम का यह शख्स पिछले तीन साल से मैनेजर की मिलीभगत से राजस्थान हाउस रुकता था. बताया जा रहा है कि मैनेजर हेमंतकांत से उसके अच्छे रिश्ते हैं. लेकिन मैनेजर ने अपने बचाव के लिए होशियारी से दिनेश खंडेलवाल को उस दिन 506 नंबर रुम में किसी रिटार्यड कर्मचारी के नाम से कमरा दे रखा था. मामला सामने आने के बाद मैनेजर ने अपनी गर्दन बचाने के लिए एक एकाऊटेंट लोकेंद्र को नोटिस थमा कर सस्पेंड करवा दिया है. जबकी कमरा देने का अधिकार अकाउंटेंट को है ही नहीं है. साथ ही इस मामले में हाउसकीपर राजेन्द्र कुमार को बलि का बकरा बनाया गया. उसे दिल्ली से जयपुर एपीओ करवा दिया.

रिटायर्ड कर्मचारी के नाम पर थी बुकिंग
पूरी जानकारी के बारे में बताया जा रहा है कि घटना के दिन कमरे में किसी शादी समारोह में भाग लेने कुछ लोग ठहरे हुए थे. लेकिन वे लोग बाहर घूमने गए पीछे से मैनेजेर ने उनके आने तक इन लोगों को रुकवा दिया था. मजे की बात यह है कि मैनेजर ने यह कमरा किसी रिटार्यड कर्मचारी के नाम आंवटित कर रखा था. जो रिश्ते में गिरफ्तार आदमी का ससुर बताया जा रहा है. 

कर्मचारी बने बलि का बकरा
इस घटना से हरकत में आए राजस्थान हाउस प्रशासन ने जल्दबाजी में दो छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बना दिया. एक अकाउंटेंट लोकेंद्र को सस्पेंड और एक रिसेप्शनिस्ट को राजेन्द्र प्को मोहरा बनाकर एपीओ करवा दिया.

जी राजस्थान को मिली अनियमितताएं
जी राजस्थान को हाथ लगे कुछ कागजातों में राजस्थान हाउस के कमरों में टीवी, एसी और कर्मचारियों को लेकर भारी अनियमितताएं सामने आई है. बताया जा रहा है कि हर माह सैफ और कुक के नाम पर 2 लाख 14 हजार का फर्जीवाड़ा करके बिल बनाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा था. राजस्थान हाउस में खाने की क्वालिटी सुधारने के लिए सरकार ने अच्छे सैफ और कुक रखने के निर्देश दिए थे. लेकिन मैनेजर ने सांठगांठ के लिए 10 से 15 हजार के सैफ औऱ कुक ऐसे ही चलते फिरते रख लिए. लेकिन उनके नाम से सरकार से हर माह सवा दो लाख उठाए जा रहे हैं. अब ये सस्ते कर्मचारी भी काम पर नहीं आ रहे है लेकिन सरकार को हर माह सवा दो लाख रुपए का चूना लगाया जा रहा है. हाजिरी रजिस्ट्री में बाकायदा देवेन्द्र सिंह, नारायण सिंह, हरीश सिंह और राज भंडारी के नाम से उपस्थिति दर्ज करके ये बिल उठाए जा रहे हैं. जबकि इन नाम के कर्मचारी मौके पर नहीं है.

हो रहा फर्जी बिल भुगतान
राजस्थान हाउस में कुल 62 कमरे रनिंग में हैं. लेकिन मैनेजर 82 टीवी केबल कनेक्शन का भुगतान सरकार से उठा रहे हैं. यानि हर माह एक कनेक्शन के हिसाब से 82 कनेक्शन के करीब 50 हजार रुपए हर महीने. फर्जी बिल केबल कंपनी के नाम स्काई वेव्ज के बनाए जा रहे हैं.

जानिए दूसरा मामला
इसके अलावा एक बड़ा खेल कागजों में कर्मचारी रखकर किया जा रहा है. पड़ताल में पाया गया है कि 7 कर्मचारी पोस्टेड ही नहीं है और उनके नाम से हर माह सवा लाख रुपए बिल उठाया जा रहा है. राजस्थान हाउस में अबरार आलम, अमित कुमार, अनिता रावत, मेवाला, रघु सिंह, रणजीत कुमार और रुस्तम अंसारी नाम के कोई कर्मचारी नहीं है. लेकिन वेतन हर महा सरकारी कोष से उठाया जा रहा है. कारनामे छुपाने के नाम पर इनको कम्यूटर ऑपरेटर, टेलिफोन ऑपरेटर सर्विस पदों पर बता रखा है. इन सबका वेतन 12 से 18 हजार रुपए प्रतिमाह दिखाया गया है.

नहीं बख्शा जाएगा दोषियों को 
मामला सामने आने के बाद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने कहा कि सीबीआई जांच में राजस्थान हाउस में चल रही अनियमितताओं की जानकारी मिली है. सीएस ने कहा कि इस पूरे मामले की ली मैंने जानकारी ली है और जल्द ही डिटेल रिपोर्ट मंगवा कर कर्रवाई की जाएगी. सीएस ने कहा कि राजस्थान हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर किसी कोई आंच नहीं आने दी जाएगी और पूरे प्रकरण में किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाएगा.

कही मामला ना रह जाए औपचारिकता
अब देखने वाली बात यह होगी की जांच में फर्जीवाड़ा औऱ मैनेजर किससे मिलीभगत का खुलासा हो पाता है ? यह फर्जीवाडा़ उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से या उन को अंधेरे में रखकर किया जा रहा था. यह तो जांच में ही खुलासा हो पाएगा या फिर हर बार की तरह छोटे कर्मचारियों को शिकार बनाकर इस मामले में जांच की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी?