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कोटा में चंबल नदी के प्रकोप से लोग परेशान, हुआ लाखों का नुकसान

व्यापारियों ने कहा कि बाढ़ का पानी इतना तेजी से चढ़ा कि सामान तक नहीं निकाल पाए. अचानक पानी से दुकानें डूब गई. दुकानों के अंदर दस-दस फीट तक पानी था.

कोटा में चंबल नदी के प्रकोप से लोग परेशान, हुआ लाखों का नुकसान
बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर व दुकानें गंदगी व कीचड़ से सनी मिली.

मुकेश सोनी/कोटा: चंबल का रौद्र रूप धीरे-धीरे शांत हो रहा है, लेकिन चंबल का विकराल रूप शांत होने के बाद वह तबाही की की तस्वीरें पीछे छोड़ गया है. लोग अपने घर और दुकानों को संभाल रहे है. हालात यह हैं कि दुर्गंध के कारण वहां ठहर तक नहीं पा रहे.

कोटा में चार दिन बाद पानी का जलजला शांत हुआ. वहीं, कोटा बैराज के गेट भी एक-एक कर बंद किए जा रहे हैं. इसके चलते कुछ बस्तियों से पानी उतर गया, लेकिन पीछे  भारी तबाही का मंजर छोड़ गया है. नयापुरा स्थित खाई रोड़ में पानी का उतरा तो व्यापारियों ने दुकानें संभालना शुरू किया. दिनभर व्यापारी दुकानों की सफाई करते नजर आए. बाढ़ में किराना, बेकरी, गल्ले का समान बह गया. व्यापारियों ने कहा कि बाढ़ का पानी इतना तेजी से चढ़ा कि सामान तक नहीं निकाल पाए. अचानक पानी से दुकानें डूब गई. दुकानों के अंदर दस-दस फीट तक पानी था. चंम्बल के विकराल रूप ने व्यापारियों को काफी नुकसान दिया.

बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर व दुकानें गंदगी व कीचड़ से सनी मिली. हालात यह है कि दुर्गंध के कारण वहां ठहर तक नहीं पा रहे, लेकिन, लोगों की मजबूरी है कि उन्हें अपने घरों व दुकानों को संभालना है. लोगों ने घरों का सामन छतों पर सुखाया. कपड़ों को पेड़ों पर सुखाया. लोगों ने बताया कि पानी का वेग इतना था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. 

बाढ़ पीडितों के मुताबिक घरों के अंदर इतना पानी था कि लोहे का ड्रम भी तैर गया. इससे सारे गेहूं खराब हो गए. उन्हें अनाज को नाली में बहाना पड़ा. फ्रिज, टीवी, हाथ मशीन, कम्प्यूटर सब में पानी भर गया. रजाई-गद्दे रखने का बड़ा बक्सा, वह भी पानी में तैर कर उल्टा हो गया. बाढ़ का पानी घर में घुसने से घरेलू सामान के अलावा बच्चों की किताबें तक खराब हो गई.

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चंबल के कहर ने निचली बस्तियों में जमकर तांडव मचाया. कई लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया. कइयों के आशियाने उजड़ गए. पानी का जलजला लोगो के सपने भी बहा कर ले गया. पीछे छोड़ गया तो बस बर्बादी की तस्वीर.