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चूरू के राजकीय सेकेंडरी स्कूल में सोलर एनर्जी से बनाई जाएगी बिजली

स्कूल में करीब 1700 से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है. राजगढ़ के इस स्कूल में ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम मुख्यमंत्री जनसहभागिता विद्यालय विकास योजना में स्वीकृत हुआ. 

चूरू के राजकीय सेकेंडरी स्कूल में सोलर एनर्जी से बनाई जाएगी बिजली

सादुलपुर: का सरकारी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम से बिजली बनाने वाला जिले का ही नहीं प्रदेश का पहला सरकारी स्कूल बन गया है. स्कूल के सोलर सिस्टम का 26 अगस्त को शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा ने उद्घाटन किया था. ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम की खास बात ये है कि इसमें उत्पादित बिजली में उपयोग लेने के बाद बची बिजली को डिस्कॉम में जमा कर सकेंगे. 

इस सिस्टम से स्कूल के जुड़ जाने से उसे प्रति माह करीब 15 हजार रुपए बिजली बिल की राशि नहीं चुकानी पड़ेगी. इतना ही नहीं कि इस सिस्टम से बचत की गई. बिजली का समयोजन आगे के बिलों में हो सकेगा. स्कूल में 20 किलोवॉट का सोलर सिस्टम लगाया गया है. जिससे हर दिन 80 यूनिट बिजली बनती है. स्कूल की खपत प्रतिदिन 50 यूनिट है. ऐसे में स्कूल प्रतिदिन 30 यूनिट के हिसाब से महीने में 900 यूनिट बिजली डिस्कॉम को बेच सकेगा अथवा आगे के बिलों में समायोजित करवा सकेगा. 

स्कूल में करीब 1700 से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है. राजगढ़ के इस स्कूल में ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम मुख्यमंत्री जनसहभागिता विद्यालय विकास योजना में स्वीकृत हुआ. भामाशाह राजेंद्र जोशी एवं उर्शला जोशी एजुकेशन ट्रस्ट जयपुर ने, स्कूल को जनरेटर के लिए 5.5 लाख रुपए दिए. इस पर ऑटोमेटिक जनरेटर सहित 13.75 लाख रुपए खर्च हुए हैं. 

प्रधानाचार्य जयवीर सिंह नेहरा ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले भामाशाह से ऑटोमेटिक जनरेटर के लिए 5.5 लाख रुपए मिले. स्कूल संचालन समिति के बीच जनरेटर खरीदने की बात चली तो संचालन में तेल खर्च वहन करने का भी जिक्र हुआ. स्कूल में लगे मीटर 3 प्रकार के होते हैं ग्रीड सोलर सिस्टम, ऑन ग्रीड में खपत के बाद बची बिजली एक्स्ट्रा पावर ग्रिड में चली जाती है. इसे बेच सकते हैं ग्रीड सोलर सिस्टम तीन प्रकार के ऑन ग्रिड, ऑफ ग्रीड और हाईब्रीड सोलर सिस्टम होते हैं. ऑन ग्रीड सिस्टम इलेक्ट्रीसिटी सप्लाई से जुड़ा है. जिसके कारण स्कूल का जितना लोड होता है. अगर सोलर उससे अधिक पावर बनाता है तो वो एक्स्ट्रा पावर ग्रीड में चली जाती है. जिसे खाते में जमा किया जाता है, जब चाहें तब उपयोग कर सकते हैं या फिर उसे इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को भी बेच सकते हैं. यह अन्य दो सिस्टम से सस्ता भी है.