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राजस्थान: शिक्षा में सुधार पर जोर, स्कूल न जाने वाले बच्चों के घर जाएंगे अध्यापक

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से शिक्षा में सुधार की कोशिशें की जा रही हैं. इसको लेकर 30 दिनों तक स्कूल ड्रॉप करने वाले बच्चों पर नजर बनी रहेगी.

राजस्थान: शिक्षा में सुधार पर जोर, स्कूल न जाने वाले बच्चों के घर जाएंगे  अध्यापक
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: अगर कोई स्कूली बच्चा 30 दिन तक स्कूल नहीं आएगा, तो उसके स्कूल से सक्षम अधिकारी या अध्यापक को उस बच्चे के घर जाना होगा और परिजनों से स्कूल नहीं आने का वास्तविक कारण पता करना होगा. 

दरअसल स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉप आउट के आंकड़े घटाने के लिए ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं. कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने कलेक्ट्रेट में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए जिला स्तरीय निष्पादन समिति की बैठक की अध्यक्षता की. कलेक्टर ने कहा कि सरकारी अध्यापक अगर ठान लें, तो वो पूरी तरीके से अपने विद्यर्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर सकते हैं.

जिला कलेक्टर का मानना है कि वास्तविक शिक्षा वही है जो शिक्षार्थी के मस्तिष्क को क्रिटिकल थिंकिंग, इनोवेशन, कम्यूनिकेशन और कोलेब्रेशन की ओर दिशा दें. विद्यालयों होने वाली बाल सभाएं भी बच्चों में कम्यूनिकेशन और कोलेब्रेशन की भावना के विकास के लिए एक अच्छा माध्यम हैं. 

जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों को भी इन बालसभाओं में जाने के लिए निर्देशित किया जाएगा. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 60 स्कूलों में लगाए गए नॉलेज बॉक्स ‘उत्कर्ष’ का जिक्र करते हुए कलेक्टर ने कहा कि अच्छा रेस्पॉन्स आने पर इसे और ज्यादा स्कूलों में प्रसारित किया जाएगा.