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गौरक्षा के लिए दारा शिकोह बना यह मुसलमान, बता रहा इस्लाम में गाय का महत्व

पूरे देश में गाय के नाम पर कथावाचक के तौर पर प्रवचन सुनाने वाले छतीसगढ़ के निवासी यह शख्स 27 महीनों से पैदल यात्रा कर रहा है.

गौरक्षा के लिए दारा शिकोह बना यह मुसलमान, बता रहा इस्लाम में गाय का महत्व
गौरक्षा के लिए यात्रा कर रहे फैज खान. (फाइल फोटो साभार: Facebook)

मनवीर सिंह चुड़ावत, अजमेर: आम तौर पर देश में गौकशी के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया जाता है. लेकिन एक मुसलमान ऐसा भी है जो गौरक्षा का झंडा बुलंद कर पूरे देश की यात्रा पर निकला हुआ है. फैज खान (Faiz Khan) नाम के इस गौरक्षक का दावा है कि इस्लाम (Islam) में भी गाय के महत्व को स्वीकार किया गया है और मुगल बादशाहों के जमाने तक गाय को कानूनी संरक्षण दिया जाता था. गौ सद्भावना यात्रा पर अजमेर पहुंचे फैज खान ने मीडिया से बातचीत में इस्लाम में गाय के महत्व पर चर्चा की.

आम तौर पर हिंदूवादी माने जाने वाले इन प्रतीक चिन्हों के बावजूद फैज खान पूरी तरह से मुसलमान है. लेकिन गौमाता के प्रति इनका समर्पण ऐसा है कि बड़े बड़े गौ रक्षक भी इनके सामने नहीं ठहर सकते. मात्र गाय की रक्षा का संकल्प मन में लिए फैज खान पिछले सत्ताईस महीनों से देश के हर शहर, गांव और ढाणी की खाक छान रहे हैं. इनके संपर्क में आने वाला हिन्दू हो या मुसलमान इन्हें कोई फर्क नही पड़ता. यह सभी को गाय के महत्व की जानकारी देते हुए उनसे गौरक्षा का संकल्प दिलवाते हैं.

पैगंबर मुहम्मद भी थे गाय के दूध के मुरीद
फैज बताते हैं कि उन्हें गाय की सेवा का महत्व इस्लाम से ही पता चला. कुरान का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कुरआन में पूरा एक अध्याय गाय को समर्पित है. कुरान में सुरा ए बकर नाम का अध्याय गाय के महत्व पर आधारित है. जो बताता है कि पैगंबर साहब भी गाय के दूध के मुरीद थे.

मुगल बादशाहों ने लागू किया था गौरक्षा के लिए कानून
फैज के अनुसार मुगल बादशाहों ने भी गाय के धार्मिक और आर्थक महत्व को समझ कर ही देश में गाय की रक्षा के लिए कानून बनाये और लागू किया है.

2017 में लेह लद्दाख से शुरू की थी यात्रा
खान के अनुसार उन्होंने अपनी यह यात्रा 24 जून 2017 को लेह लद्दाख से शुरू की थी. जब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 प्रभावी था. लेकिन अब अगले साल जनवरी में जब वो कश्मीर में अपनी इस यात्रा का समापन करेंगे तब कश्मीर अनुच्छेद 370 मुक्त हो चुका है.

मुसलमानों में नहीं है कोई भय
फैज खान मानते है कि देश में मुसलमानों के साथ मॉब लिंचिंग(Mob lynching)जैसी खबरें निराधार है. 27 महीने की इस यात्रा के बाद फैज दावा करते हैं कि उन्हें देश के सभी हिन्दू मंदिरों में सम्मान प्राप्त हुआ है. वहीं देश भर में उन्हें कहीं भी मुसलमानों में भय जैसा माहौल नजर नहीं आया . 

अजमेर में फैज खान का स्वागत एडवोकेट मुकेश दाधीच, बीजेपी नेता अनीश मोयल, बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष दीपक सिंह, अमित यादव और पिंकी जैन ने किया.