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जैसलमेर में पाकिस्तानी टिड्डी के बाद अब 'फाका' का हमला, फसलें हो रही चौपट

हाल में जो टिड्डी दलों के हमले हुए हैं वे सब फाका दल थे, जो उड़कर नहीं बल्कि तारबंदी के नीचे से भारतीय सीमा में आए हैं. म्याजलार, पोछीना, नाचना, भारेवाला व नहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में टिड्डी दलों ने हमला किया है.

जैसलमेर में पाकिस्तानी टिड्डी के बाद अब 'फाका' का हमला, फसलें हो रही चौपट
ईरान व पाकिस्तान में बड़ी संख्या में टिड्डी दलों का प्रजनन हुआ है

जैसलमेर: अब तक जितने टिड्डी दलों को स्प्रे करके मारा गया है उनसे कई गुना ज्यादा टिड्डी दल आने की तैयारी में है. इतना ही नहीं प्रजनन के बाद छोटी टिड्डियां (फाका) भी बॉर्डर पर घुसपैठ कर रही है. फाका दल उड़ नहीं सकते हैं, ऐसे में वे तारबंदी के नीचे से भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे हैं और पाक के रहिमयारखान जिले से इनकी आवक हो रही है. हाल में जो टिड्डी दलों के हमले हुए हैं वे सब फाका दल थे, जो उड़कर नहीं बल्कि तारबंदी के नीचे से भारतीय सीमा में आए हैं. म्याजलार, पोछीना, नाचना, भारेवाला व नहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में टिड्डी दलों ने हमला किया है.

ईरान व पाकिस्तान में टिड्डियों का प्रजनन के बाद जितने भी टिड्डी दल हैं, उनका हमला जैसलमेर पर ही है. ईरान व पाकिस्तान में टिड्डी दलों के नियंत्रण पर कदम नहीं उठाए गए. इसकी वजह वहां पर फसलों का नहीं होना बताया जा रहा है. इतना ही नहीं ईरान व पाकिस्तान में बड़ी संख्या में टिड्डी दलों का प्रजनन हुआ है जो धीरे-धीरे ये फाका भारतीय सीमा में आ रहा है. प्रजनन के बाद नियंत्रण नहीं होने से अब जैसलमेर से लगती सीमा में आगामी दिनों में भी प्रवेश करेगी.

किसानों के लिए मुश्किल यह है कि आगामी एक माह से अधिक समय से पहले टिड्डियों पर नियंत्रण संभव नहीं है. जिस स्पीड से इनके आने का सिलसिला चल रहा है और जिस तादाद में पाकिस्तान में देखी जा रही है उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने वाला है. जानकार यह भी बताते हैं कि अक्टूबर में भी प्रजनन हो सकता है. यदि ऐसा होता है तो समस्या बहुत बड़ी होगी.  विभाग 21 मई से लगातार टिड्डी दलों पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है. करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं.  

21 मई को जैसलमेर में पहला टिड्डी दल देखा गया था. इसके बाद धीरे धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई. इतना ही नहीं यहां पर प्रजनन भी हो गया. बार-बार यही कहा जाता रहा जरूरत पड़ने पर हवाई स्प्रे किया जाएगा, लेकिन चार माह बीत चुके हैं और करोड़ों टिड्डियां हमला कर चुकी है. हवाई स्प्रे अब तक नहीं किया गया है. फिलहाल जैसलमेर के अधिकांश सीमावर्ती इलाके में और बीकानेर के गजेवाला में टिड्डी दलों के हमले हो रहे हैं. ऐसे में राजस्थान भर के सारे संसाधन यहीं पर लगा दिए गए हैं. दर्जनों टीमें तैनात है और कंट्रोल का प्रयास किया जा रहा है. 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसे लेकर चिंता जताई है. गहलोत ने कहा कि टिड्डी दल पाकिस्तान की तरफ से आता है और फसल पर हमला करता है, फसल नष्ट हो जाती है. अभी जैसलमेर जिले में टिड्डी दल ने हमला किया हुआ है. सरकार ने अधिकारियों से कहा कि वे केंद्र सरकार के संपर्क में रहें, क्योंकि केंद्र सरकार ही आगे आकर जो कदम उठाने पड़ते है उठाती है. पहले भी ऐसे हमले हुए हैं, तो केंद्र सरकार आगे आई है. वहीं टिड्‌डी दल के हमले के पर सीएम गहलोत ने कहा कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है. हालांकि मानसून इस बार लेट पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद हर जगह पर अच्छी बरसात हुई है. 

वैसे तो टिड्‌डी को लेकर सरकार बहुत सजग है. टिड्‌डी पर रोकथाम के लिए प्रशासन को निर्देश दिए जा चुके है. इसके साथ ही प्रशासन को संपूर्ण संसाधन जुटाकर प्राथमिकता से टिड्‌डी दलों पर नियंत्रण के लिए निर्देश दिए जा चुके है. सरकार इस मामले में पूरी तरह से प्रयासरत है. जल्द ही इस क्षेत्र के टिड्‌डी दलों के आतंक से मुक्त कर दिया जाएगा. 
 
विभाग के जिम्मेदार सिर्फ यही कह रहे हैं कि हमें जैसे ही सूचना मिलती है हम मौके पर पहुंचकर उस पर कंट्रोल कर लेते हैं. लेकिन अब तक यह प्रयास नहीं किया गया कि भारतीय सीमा में घुसते ही इन पर स्प्रे कर दिया जाए ताकि आगे नहीं बढ़ सके. विशेषज्ञों का कहना है कि एक तो बॉर्डर के नजदीक हवाई स्प्रे लगातार किया जाए, साथ ही तारबंदी से नजदीक जहां से इनकी आने की संभावना ज्यादा रहती है. वहां बड़ी संख्या में टीमें तैनात रहे तो इनपर नियंत्रण संभव है.