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सोशल मीडिया पर देखा वीडियो और बना दिया देसी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

नाम मात्र की लागत में बनाये गये इस सिस्टम से बारिश का वो पानी जो पहले बर्बाद हो जाता था, अब ग्राउंड वॉटर रिचार्ज करने के काम रहा है.

सोशल मीडिया पर देखा वीडियो और बना दिया देसी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
ये वीडियो इस बात को लेकर था कि कैसे एक बड़े से ड्रम की सहायता से अपने घर और आसपास एक वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जा सकता है.

फरीदाबाद: हमारे देश की बड़ी आबादी पानी के लिये ग्राउंड वॉटर पर निर्भर है. दुनियाभर में जितना ग्राउंड वॉटर इस्तेमाल होता है, उसका 25 फीसदी भारत में उपयोग होता है. वहीं, भारत के तमाम हिस्सों में भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है. लेकिन आज हम इस समस्या की नही बल्कि इसके समाधान की बात करेंगे. फरीदाबाद के एक कम्युनिटी सेंटर के मैनेजर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखी और उस से प्रेरित होकर बना डाला रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम. नाम मात्र की लागत में बनाये गये इस सिस्टम से बारिश का वो पानी जो पहले बर्बाद हो जाता था, अब ग्राउंड वॉटर रिचार्ज करने के काम रहा है.

फरीदाबाद के एक सामुदायिक केंद्र के मैनेजर कैलाश गुगलानी के मोबाइल पर एक दिन एक वीडियो आया. ये वीडियो इस बात को लेकर था कि कैसे एक बड़े से ड्रम की सहायता से अपने घर और आसपास एक वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जा सकता है और बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है. कैलाश ने ठान लिया कि वो अपने कम्युनिटी सेंटर में भी ऐसा ही एक वॉटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम बनाएंगे. फिर क्या था कैलाश जुट गये इसे अमली जामा पहनाने में. सबसे पहले कैलाश ने 10 फीट गहरा और 6 फीट चौड़ा एक गड्ढा किया. इसके बाद उन्होंने 200 लीटर का एक ड्रम लिया और उसमें चारों तरफ ढेर सारे छेद किये. इसके बाद कैलाश ने इस ड्रम को गड्ढे के अंदर रख दिया. इस ड्रम को एक पाइप से इस तरह से जोड़ दिया गया जिससे वहां आने वाला बारिश का सारा पानी इस ड्रम में ही जाए. इसके बाद उन्होंने उस जगह को पूरी तरह से पक्का कर दिया. 

ड्रम में किये गये छेदों से बारिश का पानी ज़मीन के अंदर नीचे तक चला जाता है और ग्राउंड वॉटर रिचार्ज करने के काम आता है. इस काम को करने से पहले कैलाश ने ये देखा कि उनके कम्युनिटी सेंटर में किस जगह पर बारिश का पानी इकट्ठा होता है और फिर उसी जगह पर एक पाइप के ज़रिये पानी को गड्ढे में रखे ड्रम में डालने का इंतज़ाम किय़ा. ड्रम को रखने के बाद कैलाश ने उस गड्ढे को ऊपर से बंद करके टाइल्स लगवा दिये ताकि गंदगी उस ड्रम में न जाए. इससे वो बरसात का वो पानी जो अब तक बहकर नाली में चला जाता था वो सारा पानी इस सिस्टम के ज़रिये ज़मीन के अंदर ही जाता है. 

ऐसा नहीं है कि इस काम को करने में कैलाश को बहुत ज़्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़े. कैलाश का कहना है कि सब कुछ मिला कर भी ढाई हज़ार रुपयों से ज़्यादा खर्च इसमें नहीं आएगा. इतना ही नहीं ये वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना इतना आसान है कि कोई भी अपने घर, सोसाइटी, या पार्क कहीं पर भी इसे बना सकता है, लगातार घटते भूजल के स्तर को बढ़ाने में अपना योगदान दे सकता है.