close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

उदयपुर: मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी बना राजनीति का अखाड़ा, डीन ऑफिस में हाथापाई

उदयपुर (Udaipur) संभाग का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय(Mohanlal Sukhadiya University) इन दिनों छात्रसंघ राजनीती(Student Union Politics)का अखाडा बनता जा रहा है.

उदयपुर: मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी बना राजनीति का अखाड़ा, डीन ऑफिस में हाथापाई
आए दिन एनएसयूआई(NSUI) और एबीवीपी(ABVP)के कार्यकर्ताओं के बीच में हो रहा टकराव अब बढने लगा है.

उदयपुर: उदयपुर (Udaipur) संभाग का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय(Mohanlal Sukhadiya University) इन दिनों छात्रसंघ राजनीती(Student Union Politics)का अखाडा बनता जा रहा है. आए दिन एनएसयूआई(NSUI) और एबीवीपी(ABVP)के कार्यकर्ताओं के बीच में हो रहा टकराव अब बढने लगा है. हालात तो यहां तक पहुंच गए है कि दोनों ही संघटन के कार्यकर्ता के बीच आज डीन आफिस में जम कर हाथापाई हुई. जिन्हें काबू करने के लिए पुलिस को लाठिया भांजनी पड़ी.

दरअसल ये मामला विश्वविद्यालय के संघटक कला महाविद्यालय में सामने आया है. जहां कॉलेज के डीन चैम्बर में ही एबीवीपी और एनएसयूआई के कार्यकर्ता आपस में भीड़ गए. डीन के सामने ही दोनों पक्षों के बीच पहले तो तीखी नौक झौंक हुई और देखते ही देखते नौबत हाथापाई तक पहुंच गई. 

इस दौरान पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाला और हंगामा कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसा कर उन्हें वहां से खदेड़ा. साथ ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष निखिल राज के साथ एबीवीपी और एनएसयूआई के पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया.

बता दें कि यह पूरा विवाद बुधवार को पंडित दिन दयाल उपाध्याय की जंयती पर एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं की ओर से कला महाविद्यालय में पंडित दिन दयाल के नाम से बने सभागार का नाम बदलने को लेकर शुरू हुआ. एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने सभागार का नाम बदल कर पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर रख दिया. इसके बाद केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष निखिल राज सिंह और एबीवीपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बडी संख्या में छात्र विरोध जताने कला महाविद्यालय पहुंचे और सभागार का नाम बदलने वाले एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराने के और सभागार का नाम फिर से पंडित दिन दयाल उपाध्याय करने की मांग करने लगे.

बहरहाल छात्रसंघ चुनाव के साथ ही विश्वविद्यालय में छात्रसंघ राजनिती को लेकर दोनों संघटनों के बीच विवाद बढता ही जा रहा है. ऐसे में अगर विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से काई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो छात्रों के बीच चल रहा यह टकराव बढ़ता जाएगा जिसका सीधा असर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ेगा.