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झुंझुनूं: विश्व युद्ध में घायल सैनिकों की तर्ज पर हो रहा आमजन का इलाज

इस थैरेपी के जरिए शरीर के जिस हिस्से में ऑक्सीजन की कमी होती है, उसी जगह पर ऑक्सीजन को इंजेक्ट किया जाता है. 

झुंझुनूं: विश्व युद्ध में घायल सैनिकों की तर्ज पर हो रहा आमजन का इलाज
ओजोन थैरेपी में दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए प्रोलोजन इंजेक्शन लगाया जाता है.

संदीप केडिया. झुंझुनूं: पहले और दूसरे विश्व युद्ध में यदि सैनिक घायल हो जाते थे, तो उनका इलाज ओजोन थैरेपी (Ozone Therapy) से होता था लेकिन समय के साथ इस थैरेपी से न केवल आमजन, बल्कि चिकित्सक भी दूर होते चले गए. लेकिन आज भी इस थैरेपी को जिंदा रखने के लिए इसका प्रचार प्रसार किया जा रहा है. 

राजस्थान में पहली बार इस थैरेपी के तहत हर दर्द को दूर करने के लिए झुंझुनूं में तीन दिवसीय मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया. इसका शुभारंभ शनिवार को मोदी रोड पर स्थित गंगाराम अतिथि भवन में किया गया. कैंप का उद्घाटन शिविर के आर्थिक सहयोगकर्ता प्रवासी उद्यमी विनोद लाठ, नर सेवा नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओमप्रकाश मोदी, रामचंद्र मोदी तथा पवन गाडिया आदि ने किया. 

ओजोन थैरेपी का प्रचार-प्रसार न केवल देश, बल्कि विदेशों में करने वाले मुंबई के डॉ. केआर करनम ने बताया कि अमेरिका, स्पेन, जर्मनी और रसिया में भी तो यह थैरेपी काफी प्रचलित है लेकिन भारत में अभी इस थैरेपी का प्रचार प्रसार धीरे-धीरे हो रहा है. 

कैसे होता है ओजोन थैरेपी में इलाज
चिकित्सकों का मानना है कि शरीर में कोई दर्द हो या फिर बीमारी, वह केवल और केवल ऑक्सीजन की कमी के कारण होती है. इस थैरेपी के जरिए शरीर के जिस हिस्से में ऑक्सीजन की कमी होती है, उसी जगह पर ऑक्सीजन को इंजेक्ट किया जाता है. इसके पांच-सात दिन बाद जो भी बीमारी होती है. वो दूर भाग जाती है. झुंझुनूं में फिलहाल यह कैंप दर्द से संबंधित लगाया गया है. इसके अलावा भी अन्य बीमारियों के लिए यह थैरेपी काम ली जाती है. डॉ. करनम ने बताया कि ओजोन थैरेपी में दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए प्रोलोजन इंजेक्शन लगाया जाता है. इसे लगाने के तुरंत बाद मरीज का पूरा दर्द चला जाता है. लेकिन अगले दिन दर्द फिर आता है. लेकिन आठ-10 दिन बाद यह दर्द भी चला जाता है. साथ ही कोई दवा आदि भी नहीं लेनी पड़ती. 

राजस्थान देश का तीसरा ही राज्य
डॉ. करनम ने बताया कि ओजोन थैरेपी से इलाज भारत में कम होता है लेकिन विदेशों में यही पद्धति सर्वाधिक प्रचलित है. इनमें अमेरिका, स्पेन, जर्मनी और रसिया आदि प्रमुख है. देश में अभी महाराष्ट्र और चेन्नई के बाद इस पद्धति का कैंप राजस्थान में लगाया जा रहा है, जो तीसरा ही राज्य है. उन्होंने बताया कि इस थैरेपी में महज पांच-दस मिनट में ही इलाज संभव है. हालांकि इसका वास्तविक परिणाम एक महीने बाद नजर आता है, जिसके बाद आगे के कदम उठाए जाते हैं.

25 चिकित्सकों की टीम कर रही इलाज
कैंप के लिए करीब 25 चिकित्सकों की टीम आई है. इनमें सर्वाधिक चिकित्सक मलेशिया से आए हैं. इसके अलावा मुंबई, बैंगलुरू और हैदराबाद से भी चिकित्सक आए है. इन चिकित्सकों का हर दिन 400 मरीज देखने का लक्ष्य है लेकिन समय होने पर यह संख्या बढ़ भी सकती है. 

1 दिन पहले नहीं लेनी होती है कोई पेन किलर
आयोजन समिति के संयोजक ओमप्रकाश मोदी जयपुर और संजीव मोदी झुंझुनूं ने बताया कि रोगियों का पंजीयन पूरा हो चुका है. रविवार और सोमवार को भी पंजीकृत रोगियों को इंजेक्ट किया जाएगा. इसके अलावा रोगियों को केवल अपने साथ एक्सरे साथ लाने को कहा गया है. वहीं जो रोगी आएंगे, वे एक दिन पहले से खटाई छोड़ दें. साथ ही कोई भी इलाज चल रहा है तो उसकी रिपोर्ट साथ लेकर जरूर आएं. ओजोन थैरेपी लेने वाले सभी से आग्रह किया गया है कि शिविर में आने से पूर्व तथा बाद में खटाई की वस्तुएं नहीं खानी हैं तथा दर्द निवारक (पेन किलर) औषधि नहीं लेनी है.

शिविर के सफल आयोजन में ये टीम कर रही है काम
शिविर को सफल में दानदाता परिवार के विनोद लाठ के अलावा अनिल केजड़ीवाल, सुभाष पंसारी, शिवचरण हलवाई, एडवोकेट दिनेशचंद्र अग्रवाल, विनोद सिंघानिया, संजय शर्मा, सुशील रिंगसिया, रामचंद्र मोदी, गीलूराम मोदी, रामावतार हलवाई, पवन गाडिया समेत कई अन्य लोग काम कर रहे हैं.