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5 साल से सड़क की मरम्मत का काम सिर्फ कागज़ों पर ही चल रहा

बारां जिले से गुजरती यह सड़क कहने को तो राष्ट्रीय राजमार्ग 27 का हिस्सा है, लेकिन यहां से गुजरने पर आपको किसी कच्चे रास्ते का अनुभव मिलेगा.5 साल से यह सड़क लोगों के लिए जानलेवा बन गई है. 

5 साल से सड़क की मरम्मत का काम सिर्फ कागज़ों पर ही चल रहा

राम मेहता,बारां: जिलें से गुजरते एनएच -27 पर से अगर आप को गुज़रना है, तो जरा सावधान हो जाइएगा. क्योंकि सड़कों के खस्ताहाल होने की वजह से आप को जान हथेली पर रखनी होगी. सड़क की मरम्मत के लिए संसद से लेकर आवाज़ बुलद हो चुकी है, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हुई. राष्ट्रीय राजमार्ग 27 की 4 लेन वाली ये सड़क लोगों के सफर को आसान बनाने के लिए बनी थी, लेकिन 5 साल से यह सड़क लोगों के लिए जानलेवा बन गई है. बारां जिले से गुजरती यह सड़क कहने को तो राष्ट्रीय राजमार्ग 27 का हिस्सा है, लेकिन यहां से गुजरने पर आपको किसी कच्चे रास्ते का अनुभव मिलेगा, गुजरात के पोरबंदर से असम के सिलचर को जोड़ने वाली 3300 किलोमीटर लम्बी चमचमाती ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर, कोटा से लेकर शाहबाद तक का हिस्सा किसी बदनुमा दाग से कम नहीं है. इस 135 किलोमीटर के अनगिनत गड्ढों वाले रास्ते में एनएचएआई तीन जगह टोल टैक्स वसूलता है. पहला  सिमलिया में, दूसरा फतेहपुर में और तीसरा मुन्डियर में, मतलब तीनों जगह 270 रुपये का टोल टैक्स देना पड़ता है.

5 साल से सड़क की मरम्मत का काम सिर्फ कागज़ों पर ही चल रहा है. इन पांच सालों में ना एनएचएआई जागा, ना नेता और ना ही स्थानीय प्रशासन के लोग. सांसद दुष्यंत सिंह भी केंद्र सरकार को टोल वसूली स्थगित करने की मांग कर चुके हैं, तो उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी इस सड़क पर टोल वसूली को गलत ठहराया था.खस्ताहाल सड़क की वजह से शहर से लेकर गांव तक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण सड़क से लेकर नेशनल हाईवे भी गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं. 108 एंबुलेंस सूत्रों के मुताबिक हर दिन करीब 45 सड़क हादसे हो रहे हैं. इनमें 70 फीसदी दुर्घटनाओं की वजह खराब सड़क ही सामने आ रही है. हाईवे खराब होने के बाद हादसों की संख्या दोगुनी हो गई है. पहले जहां 25 कॉल रोज आते थे, अब इनकी संख्या बढ़कर प्रतिदिन 40 से 45 तक हो गई है. जबकि हर महीने एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान जा रही है.
मुज़म्मिल अय्यूब