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गहलोत सरकार ने 40,000 कर्मचारियों को दिया तोहफा, दिवाली पर बोनस देने का किया ऐलान

कंपनी एक्ट के तहत कार्मिकों को प्रतिवर्ष बोनस दिया जाता हैं. इस बार ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के जवाब नहीं देने पर कार्मिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी.

गहलोत सरकार ने 40,000 कर्मचारियों को दिया तोहफा, दिवाली पर बोनस देने का किया ऐलान
फाइल फोटो

जयपुर: बिजली कंपनियों में दीपावली 27 अक्टूबर से पहले ही आ गई है. चालीस हजार कर्मचारियों को बोनस मिलने जा रहा हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी के बाद ऊर्जा विभाग ने भी बोनस और एक्सग्रेसिया के आदेश जारी किए हैं. 6,774 रुपए का बोनस कार्मिकों को मिलेगा. एल 12 पे ग्रेड तक के कार्मिेकों को कंपनी एक्ट और श्रम कानूनों के प्रावधानों के अनुसार दीपावली बोनस मिलेगा.  

6,774 रुपए मिलेगा कार्मिकों को बोनस
प्रदेश की बिजली कंपनियों के कार्मिकों में आज खुशी की लहर है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने कार्मिकों को बोनस देने के आदेश जारी किए हैं. राजस्थान के जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम सहित राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड और राजस्थान उत्पादन निगम लिमिटेड के चालीस हजार कर्मचारियों को इस आदेश से लाभ मिलेगा. दीपावली नजदीक आने के बावजूद बोनस की घोषणा नहीं करने पर कर्मचारियों में आक्रोश था. ऊर्जा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार 6,774 रुपए प्रति कार्मिक बोनस मिलेगा.

राजस्थान सरकार पर इस निर्णय से 37 करोड़ 25 लाख रुपए का आर्थिक भार पड़ेगा. बिजली कंपनियों में एडहॉक बोनस को मंजूरी देने पर इंटक से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने निर्णय से खुशी जताई है. वहीं भारतीय मजदूर संघ से जुड़े राजस्थान विद्युत कर्मचारी संघ ने तय बोनस में से 223 रुपए कम दिए जाने का विरोध दर्ज करवाया हैं. ऊर्जा विभाग के लेखा खंड के अनुसार दीपावली से पहले यह राशि उनके बैंक खातो में होगी.

कंपनी एक्ट के तहत कार्मिकों को प्रतिवर्ष बोनस दिया जाता हैं. इस बार ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के जवाब नहीं देने पर कार्मिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. यहीं वजह रही की विद्वुत भवन समेत प्रदेशभर के जिला वृतों पर आज भारतीय मजदूस संघ से जुड़े कार्मिक संगठनों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. गहलोत सरकार जब पहले ही बोनस का फैसला कर चुकी थी तो अधिकारियों की यह चुप्पी त्योहारी सीजन में विद्वुत आपूर्ति सुचारू रखने में बाधा बन सकती थी, ऐसे में इन हालातों के जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन की मांग उठने लगी है.