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कोटा: कैंसर मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी, एमबीएस हॉस्पिटल में जल्द मिलेगी ये सुविधाएं

एमबीएस अस्पताल(MBS Hospital) के एक बार फिर रेडियोथेरेपी विभाग(Radio Therapy) में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगने की उम्मीद जगी है.

कोटा: कैंसर मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी, एमबीएस हॉस्पिटल में जल्द मिलेगी ये सुविधाएं
कोटा का एमबीएस हॉस्पिटल. (फाइल फोटो)

मुकेश सोनी, कोटा: एमबीएस अस्पताल(MBS Hospital) के एक बार फिर रेडियोथेरेपी विभाग(Radio Therapy) में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगने की उम्मीद जगी है. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ विजय सरदाना ने 9 साल से बंद पड़े बंकर (लीनियर एक्सीलेरेटर बेस-प्लेट) को खुलवाकर निरीक्षण किया. 

इस दौरान प्राचार्य ने अस्पताल अधीक्षक व विभागाध्यक्ष रेडियोथैरेपी विभाग के एचओडी के साथ सुविधा व व्यवस्थाओं का जायजा लिया. इसके बाद मीटिंग कर एक कमेटी का गठन किया. जो दस दिन में स्पेसिफिकेशन तैयार कर अस्पताल अधीक्षक को रिपोर्ट देगी. 

इसके बाद पीपीपी मोड पर टेंडर देने की प्रक्रिया होगी. आने वाले 6 से 8 महीनों में एमबीएस में ये सुविधा शुरू होने की उम्मीद है. टेंडर की शर्त में कोशिश होगी कि इसी बिल्डिंग का (बंकर) का उपयोग किया जाए.

9 साल का इंतजार होगा खत्म
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ विजय सरदाना ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार 2007 में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. करीब 60 लाख की लागत से कैंसर विभाग के पास साल 2010 में प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री शांति धारीवाल व कोटा महापौर डॉ रत्ना जैन द्वारा लीनियर एक्सीलेरेटर बेस-प्लेट (बंकर) का शिलान्यास किया गया. पीपीपी मोड के तहत भूमिगत तीन रूम व एक हॉल (बंकर)का निर्माण किया गया. कमरों में फर्नीचर भी लगाए गए. लेकिन किन्ही कारणों से आंशिक सिविल वर्क करवाकर फर्म ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. तब से ही ये बंकर बंद पड़ा है. मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने साल 2018 में फर्म से निर्माण कार्य का अधिग्रहण किया.

मरीजों को होगा फायदा
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में आसपास व सीमावर्ती जिलो से प्रतिदिन 80 से 90 मरीज तो केवल रेडियोथेरेपी के लिए आते है. कैंसर मरीजों को रेडियोथैरेपी के व्यवस्था पूरे संभाग में सिर्फ यही है. इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से भी मरीज यहां थेरेपी के लिए लिए आते हैं. एमबीएस में लीनियर एक्सीलेटर की अत्याधुनिक सुविधा शुरू होने से कैंसर मरीजों को फायदा होगा. कैंसर के रोगियों को उपचार के दौरान होने वाली सिकाई में काफी राहत मिलेगी. 

इसके तहत जब सिकाई में रेडियो विकिरण कैंसर प्रभावित क्षेत्र में दी जाती है, तो वो सही जगह जाती, जहां फोकस किया गया है. इस पद्धति से आस पास की जगह पर नुकसान कम होता है. इस तकनीक की मदद से उन विकिरणों पर अधिक फोकस किया जा सकेगा और मरीज की त्वचा भी नहीं जलेगी.