close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सीकर: गौशालाओं में मनाया गया गोपाष्टमी पर्व, की गई गायों की पूजा-अर्चना

भक्तगण अल सुबह से ही गौशालाओं में पहुंचे और गायों की विधिवत पूजा-अर्चना कर गायों को हरा चारा, हरी सब्जियां, गुड़ दलिया आहार खिलाकर गोपाष्टमी मनाई.

सीकर: गौशालाओं में मनाया गया गोपाष्टमी पर्व, की गई गायों की पूजा-अर्चना
कस्बे में घर-घर गायों की पूजा-अर्चना कर गोपाष्टमी पर्व मनाया गया.

सीकर: जिले के खंडेला कस्बे के निकट स्थित श्री महामाया गौशाला, श्री कृष्ण गौशाला और श्रीशेषनाग गौशाला समेत अनेक गौशालाओं में गोपाष्टमी पर्व मनाया गया. इस अवसर पर गायों की पूजा-अर्चना की गई. भक्तगण अल सुबह से ही गौशालाओं में पहुंचे और गायों की विधिवत पूजा-अर्चना कर गायों को हरा चारा, हरी सब्जियां, गुड़ दलिया आहार खिलाकर गोपाष्टमी मनाई.

गोपाष्टमी के अवसर पर अनेक भक्तों ने गौशाला समिति को नकदी एवं हरे चारे से भरी गाड़ी उपलब्ध करवाकर सहायता की. साथ ही इस मौके पर अनेक लोगों ने गुप्त दान भी किया. श्री महामाया गौमाता गौशाला समिति के अध्यक्ष स्वामी विश्वरूप दास काठिया बाबा ने जानकरी देते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने जिस दिन से गायों को पालन करना शुरू किया था, उसी दिन को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है. 

गायों को जननी के रूप में माना जाता है. पृथ्वी का स्वरूप भी गाय का ही स्वरूप होता है. गोपाष्टमी पर्व धर्म के प्रतीक के रूप में है. जब भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गायों की सेवा पूजा-अर्चना कर सकते हैं तो हमें भी गायों की सेवा पूजा-अर्चना और उनकी देखभाल एक सदस्य की तरह करनी चाहिए. गोपाष्टमी के दिन सुबह से ही भक्तों की भीड़ गौशालाओं में गायों की सेवा पूजा-अर्चना में लगी रही. इसके साथ ही कस्बे में भी घर-घर गायों की पूजा-अर्चना कर गोपाष्टमी पर्व मनाया गया.

ये है मान्यता
भगवत पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक इंद्र के प्रकोप से गो-गोप-गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर धारण किए रहे. अष्टमी के दिन इंद्र ने अपनी पराजय स्वीकार कर ली. उनका अहंकार टूट गया और वे श्रीकृष्ण के शरण में आ गए. कार्तिक शुक्ल अष्टमी को कामधेनु ने भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया. उस दिन भगवान श्रीकृष्ण गोविंद कहलाए. उस दिन के बाद से ही हर वर्ष कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जाने लगा.

Edited by : Pooja Sharma, News Desk