80 साल के सुलेमान को संगीत का लगा ऐसा चस्का, घर में सहेज रखे हैं 150 कंपनियों के रेडियो

सुलेमानभाई आज 80 वर्ष की आयु के हैं और वे आज भी न केवल अपने बाग-बगीचों की देखभाल करते हैं बल्कि कई साल पहले के रेडियो का ध्यान रखते है.

80 साल के सुलेमान को संगीत का लगा ऐसा चस्का, घर में सहेज रखे हैं 150 कंपनियों के रेडियो
विभिन्न रेडियो की आवाज़ के साथ-साथ ग्रामोफ़ोन रैप रिकॉर्डर को सुन कर एक अनोखा एहसास होता है.फोटो

गुजरात: अमरेली जिले के धारी तालुका के चलाला गांव में रिटायर्ड शिक्षक को अनोखा शौक है. इन्हें अलग अलग कंपनियों के पुराने रेडियो को संभाल कर रखने का शौक है और ये सभी रेडियो अभी भी बज रहे हैं. इसी शौक के नाते आज उनका घर रेडियो घर या कहें तो रेडियो म्यूजियम बन गया है. धारी तालुका का ये चलाला गाँव है. यहां की दानेव सोसाइटी में अनोखे शौक वाले रिटायर्ड शिक्षक सुलेमान भाई का घर है. सुलेमानभाई आज 80 वर्ष की आयु के हैं और वे आज भी न केवल अपने बाग-बगीचों की देखभाल करते हैं बल्कि कई साल पहले के रेडियो का ध्यान रखते है.

उनको शुरू से ही रेडियो के प्रति आकर्षण था. दरअसल वे अपनी जवानी के समय में रेडियो रिपेयरिंग का काम किया करते थे और इसी से उन्हें विदेशी कंपनी के रेडियो इकट्ठा करने का शौक जगा. आज, 80 वर्ष की आयु में भी, कई अलग-अलग कंपनी के रेडियो को संभाल रखे हैं. विभिन्न रेडियो की आवाज़ के साथ-साथ ग्रामोफ़ोन रैप रिकॉर्डर को सुन कर एक अनोखा एहसास होता है.

रेडियो और नई पीढ़ी के बीच के संबंध के बारे में सुलेमान के मित्र रत्तीलाल कहते हैं कि नई पीढ़ी को केवल मोबाइल में दिलचस्पी है, रेडियो गाँव और शहर के आम लोगों के जीवन का माध्यम है, और रेडियो से प्रसारित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रसारण कार्यक्रम हैं जो आज के टीवी पर बहुत कम प्रसारित किए जा रहे हैं. इस लिए रेडियो संस्कारों का माध्यम जरूर कह सकते हैं.

इसी भी देखें:-  

नई पीढ़ी को रेडियो सिर्फ चित्र में देखने मिलते है आज रेडियो का अस्तित्व रहा नहीं है. नई पीढ़ी को अगर रेडियो देखने हो और उन्हें रेडियो सुनना हो तो सुलेमान भाई के घर जरूर आए. यहां चालू स्थिति में 125 जितने विविध देश और कंपनी के रेडियो मौजूद है.

चलाला में सुलेमान का निवास आज एक रेडियो संग्रहालय बन गया है, और जब 150 रेडियो सुनते हैं तो अतीत के संगीत की दुनिया में खो जाते हैं, अगर इस तरह के एंटीक हॉबीस्ट को उचित प्रोत्साहन मिले तो रेडियो के महत्व को नई और पुरानी पीढ़ी को समझाया जा सकता है.