गुजरात के पकौड़े बेचने वाले की लड़की बनी 'दंगल गर्ल', गरीबी से टूट रहा सपना तो लगाई गुहार

 दरअसल दंगल गर्ल विद्या के पिता पकोड़े और समोसे बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं. इस परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है. 

गुजरात के पकौड़े बेचने वाले की लड़की बनी 'दंगल गर्ल', गरीबी से टूट रहा सपना तो लगाई गुहार
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुजरात: गुजरात सरकार द्वारा युवाओं की खेल के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए खेले गुजरात जोरशोर से का प्रचार किया जा रहा है. वहीं वड़ोदरा की एक दंगल गर्ल विधा ठाकुर फुटपाथ पर कुश्ती की प्रैक्टिस करने पर मजबूर है. विधा के पिता इस दंगल गर्ल को फुटपाथ पर कुश्ती की प्रैक्टिस करवाते हैं. आखिर विधा क्यों कुस्ती खेलने के लिए एकेडमी नहीं जा पा रही है, उसकी ऐसी क्या मज़बूरी है यह जानना भी जरुरी है. दरअसल दंगल गर्ल विद्या के पिता पकोड़े और समोसे बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं. इस परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है.

विधा का परिवार मुजमहोडा के पास स्थित एक झोपड़पट्टी में रहता है
विधा का परिवार मुजमहोडा के पास स्थित एक झोपड़पट्टी में रहता है. विधा अपने परिवार की आर्थिक परिस्थिति के कारण काफी हुनर होने के बाद भी एकेडमी में नहीं जा पा रही है. विधा 11 वी कक्षा की छात्रा है और पढाई के साथ कुश्ती भी खेलती है.  इस दंगल गर्ल के पिता उसे घर के बहार बने फुटपाथ पर उसे रोज प्रैक्टिस करवाते हैं. 

दंगल फिल्म से प्रभावित होकर विधा ने कुश्ती खेलना शुरू किया
ताकि उसका इंटरनेशनल चैम्पियन बनने का सपना साकार हो सके. दंगल फिल्म से प्रभावित होकर विधा ने कुश्ती खेलना शुरू किया. सिर्फ एक साल में ही विधा स्टेट और नेशनल लेवल पर कुश्ती में भाग ले चुकी है और 2 गोल्ड ,4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मैडल जीत चुकी है. इसके उपरांत खेल महाकुम्भ में भी विधा ने कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन किया था और मैडल जीते.

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विधा को अब अपने देश भारत के लिए पार्टिसिपेट करना है ये उनका सबसे बड़ा सपना है, विधा को गीता और बबिता फोगाट की तरह अपने देश भारत को गोल्ड मैडल दिलवाना है लेकिन उसे सरकार से मदद की जरुरत है. विधा के पिता का कहना है की वह स्वयं भी मथुरा में कुश्ती खेलते थे, विधा के दादा जी परदादा जी भी कुश्ती खेलते थे.

इसलिए वो अपने काम के साथ साथ विधा को कुश्ती भी सिखाते है. शुरुआत में विधा को अखाड़े में कुश्ती सिखने के लिए भेजा था लेकिन आने जाने के लिए किराया ज्यादा होने की वजह से विधा को अखाड़े में कुश्ती सिखने के लिए जाना बंद करना पड़ा और अब वह खुद ही बेटी को घर के पास फुटपाथ पर कुश्ती के दांवपेच सीखाते है.

विधा की माँ भी लोगों और सरकार से अपनी बेटी को मदद करने के लिए गुहार लगा रही है
विधा की माँ भी लोगों और सरकार से अपनी बेटी को मदद करने के लिए गुहार लगा रही है. विधा की माँ का कहना है की अगर उनकी बेटी को मदद मिलगी तो विधा जरूर कुश्ती में गोल्ड मैडल लेकर आएगी ये उन्हें पूरा भरोसा है. हलाकि कुछ लोग विधा को यथाशक्ति मदद देने की कोशिश कर रहे हैं. 

पर इंटरनेशनल कुश्ती के दंगल लेने के लिए अच्छी एकेडमी की जरुरत है. महत्वपूर्ण बात यह है की विधा के पिता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बेटी के सूत्र से प्रेरित होकर अपनी बेटी को दंगल गर्ल बनाने के लिए तैयार हुए. लेकिन आर्थिक परिस्थिति ख़राब होने की वजह से और सरकारी मदद नहीं मिलने की वजह से विधा को कुश्ती  में आगे नहीं बढ़ा पा रहे है, पर उन्हें विध्वस है की एक दिन विधा उनका या गुजरात का ही नहीं पूरे देश का नाम रोशन करेगी.