पतंग के मांझे से कटकर हुई पक्षियों की मौत, लोगों ने निकाली अंतिम यात्रा

उत्तरायण के दौरान पतंग के मांजे से हुई पक्षियों की मौतों को लेकर बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में पक्षी प्रेमियों ने ‘पक्षिओं’ की अंतिम यात्रा निकाली.

पतंग के मांझे से कटकर हुई पक्षियों की मौत, लोगों ने निकाली अंतिम यात्रा

मेहसाणा: मकर संक्रांति (उत्तरायण) के मौके पर पतंगबाजी करने का रिवाज है. खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में जमकर पतंग उड़ाई जाती है. इस दिन पतंगबाजी करने के लिए देश-विदेश से सैलानी गुजरात पहुंचते हैं. मकर संक्रांति के दिन रंग बिरंगे पतंगों से सजा आसमान काफी खूबसूरत भी लगता है लेकिन बेजुबान पक्षियों के लिए यह परेशानी का सबब बन जाता है. पतंग के मांझे से पक्षियों की मौत हो जाती है. 

उत्तरायण के दौरान पतंग के मांजे से हुई पक्षियों की मौतों को लेकर बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में पक्षी प्रेमियों ने पक्षिओं की अंतिम यात्रा निकाली. इसमें भारी संख्या में पक्षी प्रेमी शामिल हुए. पक्षी प्रेमियों का कहना है कि इसे लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए यह अंतिम यात्रा निकाली गई है. अंतिम यात्रा में लोगों ने 'हाए रे चीन, हाए रे चीन के' नारे लगाए. लोगों का मानना है कि ज्यादातर चाइनीस मांझे के चलते पक्षियों की मौत होती है. 

उधर, अहमदाबाद के बापू नगर में भी पारेवड़ा ग्रुप और सर्व समाज शक्ति संगठन के लोगों ने पक्षियों की अंतिम यात्रा निकाली. उन्होंने बताया कि अकेले अहमदाबाद में 565 मांझे से घायल पक्षियों को इलाज के लिए लाया गया था. लेकिन इलाज के दौरान 72 पक्षियों की मौत हो गई. 

गुजरात के पाटण में भी पतंगबाजी के दौरान मांझे की चपेट में आकर 116 पक्षी घायल हुए थे. इनमें से इलाज के दौरान 60 पक्षियों ने दम तोड़ दिया. यहां भी पक्षियों की अंतिम यात्रा निकाली गई. शहर के रेलवे स्टेशन से यात्रा निकालकर सरस्वती नदी इलाके में इन पक्षियों को दफनाया गया.

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