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बाड़मेर में दिव्यांग बच्चों ने किया कमाल, हुनर के कायल हुए लोग

निजी संस्था श्योर के माध्यम से एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जन्म से ही दिव्यांग हैं. कोई सुन नहीं सकता तो कोई देख नहीं सकता. 

बाड़मेर में दिव्यांग बच्चों ने किया कमाल, हुनर के कायल हुए लोग
इन बच्चों से घर वालों ने भी आस छोड़ दी थी.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिला मुख्यालय पर स्थित 'श्री सत्य साईं अंध एवं मूक बधिर विद्यालय' में कुछ दिव्यांग बच्चों ने अपनी कला से लोगों को अपना दीवाना बना लिया है. वैसे तो, इस स्कूल के बच्चे कहने को दिव्यांग हैं लेकिन जो भी इनसे पहली बार रुबरू होता है वह इनका कायल हो जाता है.

दरअसल, निजी संस्था श्योर के माध्यम से एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जन्म से ही दिव्यांग हैं. कोई सुन नहीं सकता तो कोई देख नहीं सकता. यहां तक कि इन बच्चों से इनके घर वालों ने भी आस छोड़ दी थी, लेकिन अब यही बच्चे लोगों की आंखों का तारा बन गए हैं. आपको बता दें कि,  बाड़मेर जिला मुख्यालय पर निजी संस्थान श्योर ने सरकार के माध्यम से एक स्कूल खोला, जिसमें ऐसे 100 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं. 

वहीं, इन 100 बच्चों में 7-8 बच्चे बहुत खास हैं. इनमें से कोई ढोलकी बजाने में तो कोई हारमोनियम बजाने में उस्ताद है. वहीं, कोई गाने में माहिर है. बता दें कि ये बच्चे 15 अगस्त को स्टेडियम में देशभक्ति के गीतों से लोगों का दिल जीत चुके हैं. साथ ही ये सामाजिक कार्यक्रमों में भी संगीत के जरिए लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुके हैं. खास बात ये कि ये बच्चे सिर्फ गाने बजाने में माहिर नहीं है बल्कि कंप्यूटर के एक्पर्ट भी हैं. 

बता दें कि, इन बच्चों के प्रति लोगों का प्यार और कला का सम्मान ऐसा है कि लोग अपना जन्मदिन मनाने के लिए होटलों की जगह इन दिव्यांग बच्चों के साथ मनाते हैं. इतना ही नहीं कई बड़े अधिकारियों से लेकर नेता भी बेहद खास मौके पर इस स्कूल में जरूर आते हैं.

'श्योर संस्था' अध्यक्ष लता कछवाह का कहना है कि कोई सरकारी स्कूल इन बच्चों को जोड़ने को तैयार नहीं था. तब संस्था ने संपर्क करके स्पेशल टीचर के साथ गांव में बच्चों को जोड़ने का प्रयास किया और यह प्रयास सफल हुआ. इस स्कूल से पढ़ रहे कुल 6 बेच निकले हैं, जिनमें से कई बच्चे सरकारी नौकरी में है. वहीं, कई बच्चे अभी अध्ययन कर रहे हैं.