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जर्जर हालात में पड़ा हॉस्टल बना नशेड़ियों का अड्डा, किराए के घर में रहने को मजबूर हैं छात्र

जिला मुख्यालय पर हनुमानगढ़ टाऊन में स्थित जिले के सबसे पुराने और सबसे बड़े राजकीय एनएमपीजी महाविद्यालय में 4200 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं. 

जर्जर हालात में पड़ा हॉस्टल बना नशेड़ियों का अड्डा, किराए के घर में रहने को मजबूर हैं छात्र
2004-05 में सार्वजनिक निर्माण विभाग ने निरीक्षण के दौरान होस्टल परिसर की इमारत को जर्जर घोषित कर दिया था

मनीष शर्मा, हनुमानगढ़: जिले के सबसे बड़े राजकीय एनएमपीजी महाविद्यालय में एक अदद छात्रावास की जर्जर हालातों का खामियाजा ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है. हॉस्टल की जर्जर इमारत अब किसी छात्र की रिहायश तो नहीं रही बल्कि नशेड़ियों की शरणगाह बनती जा रही है.

जिला मुख्यालय पर हनुमानगढ़ टाऊन में स्थित जिले के सबसे पुराने और सबसे बड़े राजकीय एनएमपीजी महाविद्यालय में 4200 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं. जिसमें से 2000 से अधिक विद्यार्थी ग्रामीण परिवेश से आते हैं. कॉलेज में छात्रावास ना होने से एक छात्र को कमरे के लिए औसतन 6 से 10 हजार का आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है और दूसरी तरफ बरसों से जर्जर इस छात्रावास के पुनर्निर्माण के कोई कदम नहीं उठाए जा रहे.

महाविद्यालय के इस छात्रावास का निर्माण 1968-69 के सत्र में जिले के पन्नीवाला गांव के कुंवर बहादुर सिंह राठौड़ की स्मृति में उनके सुपुत्र श्योराण सिंह राठौड़ ने करवाया था. दानदाताओं की कोशिश थी कि शिक्षा के लिए आने वाले छात्रों को खाने पीने और रहने की सुविधा मिल सके साथ ही खर्च भी कम हो.

साल 2004-05 के सत्र में सार्वजनिक निर्माण विभाग ने निरीक्षण के दौरान होस्टल परिसर की इमारत को जर्जर घोषित कर दिया था. जिसके बाद से कॉलेज प्रशासन ने छात्रावास में कमरा आवंटन बन्द कर दिया. जिसके बाद से अच्छे काम के लिए निर्मित छात्रावास परिसर लगातार नशेड़ियों का अड्डा बनता चला गया. हालांकि, पुलिस के सख्ती के बाद हालात कुछ सुधरे भी हैं लेकिन अभी इस परिसर को नशेड़ियों से निजात नहीं मिल पाया है.

--सुमित सिंह, न्यूज डेस्क