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अजमेर: कांग्रेस नेताओं को नहीं है इंदिरा गांधी के प्रतिमा की सुध, अनावरण का है इंतजार

वैसे तो भगवान राम का वनवास तो 14 साल में समाप्त हो गया था. लेकिन प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अजमेर में वनवास पिछले 18 सालों से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

अजमेर: कांग्रेस नेताओं को नहीं है इंदिरा गांधी के प्रतिमा की सुध, अनावरण का है इंतजार
इंदिरा गांधी की आदमकद प्रतिमा अब तक अनावरण का इंतजार कर रही है.

मनवीर सिंह चुड़ावत, अजमेर: वैसे तो भगवान राम का वनवास तो 14 साल में समाप्त हो गया था. लेकिन प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अजमेर में वनवास पिछले 18 सालों से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अजमेर में इंदिरा गांधी की आदमकद प्रतिमा पहले 16 साल तक तत्कालीन अजमेर नगर सुधार न्यास की कैद में रही. वहीं, पिछले दो सालों से उन्हीं की पार्टी के कर्णधारों ने उन्हें सडक किनारे कपड़े और रस्सियों से बांध कर पटक रखा है. 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को देश और दुनिया में एक बुलंद हौसलों वाली लौह महिला के नाम से जाना जाता है. लेकिन कहते हैं कि जब घर की ही औलाद निक्कमी हो तो बाहर वालों को क्या दोष दिया जाए. यह सब कुछ लिखने की जरुरत आज केवल इसलिए पड़ रही है क्योंकि प्रदेश की सत्ता पर काबिज उन्हीं की पार्टी के नेताओं की लापरवाही का दंश पूर्व प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी की आदमकद प्रतिमा को भुगतना पड़ रहा है. लौह महिला की वेदना इतनी है कि उनमे आस्था रखने वाले किसी भी देश भक्त का मन पसीज जाए. लेकिन नहीं पसीज रहा है तो कांग्रेस नेताओं का दिल.

16 साल तक धूल फांकती रही मूर्ति
इंदिरा गांधी की प्रतिमा की दुर्गति की कहानी शुरू हुई आज से लगभग 18 साल पहले. जब कांग्रेस नेताओं ने स्टेशन रोड स्थित उनके स्मारक पर से तैलचित्र हटा कर एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया. तत्कालीन समय की कांग्रेस सरकार के अधीन आने वाले अजमेर नगर सुधार न्यास ने जिम्मा उठाया और इंदिरा गांधी की एक आदमकद प्रतिमा बना कर मंगवा ली गयी. जिसके बाद 16 सालों तक यह प्रतिमा अजमेर नगर सुधार न्यास के दफ्तर के स्टोर रूम में पड़ी धुल फांकती रही. प्रतिमा को स्थापित किये जाने में कभी राजनीती आड़े आई तो कभी दुसरे विवाद.

आयरन लेडी को नहीं मिली कैद से मुक्ति
इंदिरा गांधी की इस प्रतिमा को बंद स्टोर रूम की सीलन और बदबू से मुक्ति तब मिली जब मीडिया ने यह मुद्दा उठाया. तत्कालीन शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह रलावता ने इस प्रतिमा को बाकायदा नगर सुधार न्यास से कीमत अदा कर खरीदा. यह अलग बात है कि अब कांग्रेस की निजी सम्पत्ति हो चुकी इंदिरा गांधी की प्रतिमा को कैद से मुक्ति नहीं मिली. पहले गनीमत थी कि इंदिरा गांधी की यह प्रतिमा बंद कमरे में दुर्गति का शिकार हो रही थी. हालात बदले तो खुद इंदिरा गांधी की ही पार्टी कांग्रेस के नेताओं ने उनकी सार्वजनिक दुर्गति करना शुरू कर दिया. अब पिछले दो साल से कांग्रेस नेताओं ने इंदिरा गांधी की इस प्रतिमा को रेलवे स्टेशन रोड पर उनके स्मारक पर कपड़ा और रस्सी लपेट कर बंधक बना रखा है.

मूर्ति के अनावरण के लिए सचिन पायलट पास नहीं है समय
इस मामले में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस प्रतिमा के अनावरण का समय प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को नहीं मिल पाया है. यह अलग बात है कि बीते दो सालों में पायलट कई बार अजमेर आये. लेकिन या तो इन कांग्रेस नेताओं ने उनसे समय नही मांगा या फिर उन्हें समय ही नहीं मिला. जिस कारण आज पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यह प्रतिमा सडक किनारे खड़ी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है. 

आवारा लोगों का लगा रहता है जमावड़ा
इसके अलावा इंदिरा गांधी का स्मारक मुख्य सड़क पर नशेबाजों और आवारा लोगों का शिकार हो रहा है. गंदगी ने स्मारक को अपना घर समझ लिया है. नशेबाज इस स्मारक पर नशा करते है तो शराब की खाली बोतले यही फैक कर चले जाते है. इतना सब होने के बावजूद इंदिरा गांधी को इस अघोषित नजरबंदी से मुक्ति नही मिल पा रही है.