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जानिए कौन हैं अलवर के बाबा कमलनाथ, जिनसे RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लिया आशीर्वाद

बाबा के आश्रम में इलाज कराने वालों की लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सहित विनय कटियार और पूर्व राजस्थान पुलिस प्रमुख ज्ञानचंद पिलानिया भी शामिल रहे है.

जानिए कौन हैं अलवर के बाबा कमलनाथ, जिनसे RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लिया आशीर्वाद
तिजारा क्षेत्र के गहनकर गांव में बाबा कमलनाथ का आश्रम है.

अलवर: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) इन दिनों राजस्थान के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने बुधवार को अपने जन्मदिन के मौके पर अलवर जिले में 123 साल के बाबा कमलनाथ से मुलाकात की. बाबा कमलनाथ से मुलाकात के दौरान मोहन भागवत ने आशीर्वाद भी लिया.

अलवर जिले के गहनकर गांव में रहने वाले बाबा कमलनाथ सामाजिक विकास कार्यों से जुड़े हुए हैं. उनके आश्रम में निशुल्क दवा बांटी जाती है. यहां निशुल्क दवा बांटने का सिलसिला पिछले 40 साल जारी है. बाबा के आश्रम में इलाज कराने वालों की लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सहित बीजेपी नेता विनय कटियार और पूर्व राजस्थान पुलिस प्रमुख ज्ञानचंद पिलानिया का भी नाम शामिल रहा है. इस कार्य में 123 साल की उम्र में भी बाबा कमलनाथ लगातार लगे हुए हैं.

मीडिया से बातचीत में बाबा कमलनाथ ने देश की हालत पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि देश का युवा भटक रहा है. उन्होंने देश में गौहत्याएं रोकने की भी बात कही.

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जानिए बाबा की कहानी
बाबा कमलनाथ का जन्म बिहार के गोविंदपुर में 1896 में हुआ था. इस इस दौरान बाबा कमलनाथ 30 साल तक काफी संघर्ष किया. इस दौरान अपने गुरु भोजनाथ के साथ काशी में उनके सानिध्य में रहने के बाद तीन साल बाद गुरु भोजनाथ चोला के शरीर त्यागने के बाद बाबा कमलनाथ ने जंगलों में रहकर दस वर्ष तक नग्न अवस्था मे जंगल मे तपस्या की. इसके बाद हरियाणाके पलवल क्षेत्र के लादिया गांव में एक आश्रम में भी रहे. बाबा को वनस्पतियों, पेड़ पौधों से शुरू से लगाव था. यहां प्रवास के दौरान उन्होंने नदी किनारे कई पेड़ लगाए. इसके बाद देश के सारे तीर्थस्थलों का पैदल भ्रमण किया. 1980 के दशक में उन्होंने आश्रम की स्थापना की. इस दौरान बाबा ने गहनकर में बाल मंडल बनाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया.

यहां पिछले 15 सालों से रोजाना सुबह बाबा के सानिध्य में किसी न किसी धार्मिक ग्रन्थ का पारायण होता है और फिर सत्संग का कार्यक्रम चलता है, साथ हरिकीर्तन, रामधुनी भजन चलते है. यहां सुबह आसपास के ग्रामीण इसमे शामिल होते है. यहां हर माह अमावस्या औऱ पूर्णिमा को गीता पूर्ण होने पर हवन यज्ञ का आयोजन होता है. इस दौरान गीता का पठन शुरू हो जाता है.