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पति ने दिया इतना गुजारा भत्ता कि गिनने में लग गया पूरा दिन, अदालत की कार्रवाई रोकनी पड़ी

पत्‍नी को गुजरा भत्‍ता देने के लिए वकील पति बोरे में भरकर सिक्‍के लाया था. इतने सारे सिक्‍के देखकर महिला ने अपनी नाराजगी जताई और कहा कि ये उन्हें प्रताड़ित और परेशान करने का एक नया तरीका है.

पति ने दिया इतना गुजारा भत्ता कि गिनने में लग गया पूरा दिन, अदालत की कार्रवाई रोकनी पड़ी
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: पति और पत्नी के बीच अलगाव की स्थिति में गुजारा भत्ता पाना पत्नी का अधिकार है, खासतौर से तब जबकि वो पूरी तरह अपने पति पर निर्भर रही हो. लेकिन अकसर गुजारा भत्ते को लेकर खींचतान देखने को मिलती है. ऐसे ही एक मामले में चंड़ीगढ़ की एक अदालत में मंगलवार एक व्‍यक्ति ने अपनी पूर्व पत्‍नी को गुजारा भत्‍ते के रूप में 24600 रुपये दिए. लेकिन ये पूरी राशि एक और दो रुपये के सिक्के के रूप में थी. ये सिक्के इतने ज्यादा थे कि उन्हें गिनने में पूरा दिन निकल गया और अदालत की कार्रवाई स्‍थगित करनी पड़ी. 

जिस व्यक्ति ने मुआवजे की ये राशि दी, वो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में वकील है. पत्‍नी को गुजरा भत्‍ता देने के लिए वकील पति बोरे में भरकर सिक्‍के लाया था. इतने सारे सिक्‍के देखकर महिला ने अपनी नाराजगी जताई और कहा कि ये उन्हें प्रताड़ित और परेशान करने का एक नया तरीका है. दोनों ने 2015 में तलाक के लिए आवेदन दिया था. 

अदालत ने वकील पति ने कहा कि वो हर महीने अपनी पत्नी को 25 हजार रुपये गुजारा भत्‍ता दे. इसके बाद भी पति ने गुजारा भत्‍ता नहीं दिया. इस पर पत्नी ने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया. इस पर कोर्ट ने पति ने कहा कि वो दो महीने के बकाया गुजारा भत्‍ता के रूप में पत्‍नी को 50 हजार रुपये दे. पति ने दलील दी कि उसके पास पैसे नहीं हैं. 

हालांकि महिला ने कहा कि उनके पति एक जानेमाने वकील हैं और कई बड़े लोग उनके क्‍लाइंट हैं. उनके नाम पर कई संपत्तियां भी हैं. ऐसे में उनके पास पैसे न होने की बात सही नहीं है. इसके बाद अदालत ने वकील को तत्काल मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके बाद वकील ने अदालत में 24600 रुपये जमा कराए, लेकिन ये पूरी राशि सिक्कों के रूप में थी. 

महिला ने कहा, 'मुझे पैसों की तत्काल आवश्यकता है. पहली बात कि उन्‍होंने कई सुनवाई के बाद उन्‍होंने पैसा दिया. यह पैसा भी उन्‍होंने सिक्‍के में दिया. मैं इस पैसे का क्‍या करुंगी? कोई भी बैंक इसे स्‍वीकार नहीं करेगा.'

वकील ने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा, 'ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि पैसा 100, 500 और 2000 रुपये के नोट में देना है.' मैंने अपने तीन जूनियरों को इस पैसे को गिनती करने के लिए दिया था।' अदालत अब इस मामले की सुनवाई 27 जुलाई को करेगी.