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चित्तौड़गढ़ के इस मंदिर में चोरों की मनोकामना भी होती है पूरी, पढ़ें खबर

जोगणिया माता लोक आस्था की देवी हैं जिन्हें एक चमत्कारी देवी के रूप में जाना जाता है. देवी मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो शेरों की सजीव आकृतियां बनी हैं. 

चित्तौड़गढ़ के इस मंदिर में चोरों की मनोकामना भी होती है पूरी, पढ़ें खबर
लोकमान्यता है कि पहले यहां अन्नूपर्णा देवी का मंदिर था.

दीपक व्यास, चित्तोड़गढ़: पहाड़ी और सौंदर्य के बीच स्थित पूराणा और अद्भूत माता का मंदिर है. जिले से लगभग 85 किलोमीटर दूर राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा से लगते उपरमाल पठार के दक्षिणी छोर पर जोगणिया माता का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है. इतिहास के अनुसार इस मंदिर का निर्माण आंठवी शताब्दी के लगभग हुआ था. 

लोकमान्यता है कि पहले यहां अन्नूपर्णा देवी का मंदिर था. जिसके बाद अन्नपूर्णा के बजाय जोगणिया माता के नाम से यह शक्ति पीठ पूरे लोक में प्रसिद्ध हुआ. मंदिर परिसर में लटकी हुई हथकड़ियों के बारे में कहा जाता है कि चोर और डाकू वारदात को अंजाम देने से पहले माता का आशीर्वाद लिया करते थे. जिनके पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद मौके से फरार होते हुए मां के दरबार पहुंचते थे जहां उनके हाथों में लगी बेड़िया स्वतः ही खुल जाया करती थीं.

जोगणिया माता लोक आस्था की देवी हैं जिन्हें एक चमत्कारी देवी के रूप में जाना जाता है. देवी मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो शेरों की सजीव आकृतियां बनी हैं. मंदिर के गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित है. मंदिर परिसर में दो शिव मंदिर बने हुए हैं. जहां वर्षपर्यंत गोमुख से रिस-रिसकर बहती जलधारा पर्वतमाला और सुरम्य वन्य क्षेत्र से आवृत इस मंदिर में नैसर्गिक सौंदर्य में अतिशय वृद्धि कर देते है. माता की कृपा से मनोवांछित फल पाने हेतु श्रृद्धालु बड़ी संख्या में देवी के इस मंदिर में आते हैं. वैसे तो वर्ष पर्यंत ही यहां श्रृद्धालुओं की आवाजाही रहती है लेकिन नवरात्रा के दिनों में यहां मेले जैसा माहौल रहता है. जहां नौ दिनो तक हजारों श्रृद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामना मांगते हैं.

जिले के शक्तिपीठों में से एक जोगणिया माता के चमत्कार के चलते श्रृद्धालुओं की अगाढ श्रृद्धा का केंद्र होने के साथ ही पहाड़ के ऊपर और प्रकृति की गोद में बसा यह मंदिर दार्शनिक और पर्यटक स्थल के नाम से जाना जाता है.