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महाराष्ट्र: एक और निर्दलीय विधायक ने दिया शिवसेना को समर्थन, संख्या पहुंची 62

शिवसेना को अभी तक छोटे दल और निदर्लीय मिलकार कुल 6 विधायकों का समर्थन मिला. 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के अपने 56 विधायक चुनाव जीत कर आए है

महाराष्ट्र: एक और निर्दलीय विधायक ने दिया शिवसेना को समर्थन, संख्या पहुंची 62
धुले जिले की साक्री विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक मंजुला गावित ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलकर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा. (फोटो-ANI)

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजों के बाद राज्य में अभी तक नई सरकार का गठन नहीं हुआ है. हालांकि नतीजों बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन को बहुमत तो मिल गया है लेकिन सीएम पद को लेकर दोनों ही पार्टियां अड़ी हुई हैं. ऐसे में अब दोनों ही पार्टियों में निर्दलीय विधायकों के शामिल होने का सिलसिला भी तेज हो गया है. बुधवार को महाराष्ट्र में एक और निर्दलीय विधायक शिवेसना में शामिल हो गए. धुले जिले की साक्री विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक मंजुला गावित ने शिवसेना का समर्थन देने का ऐलान किया. मंजुला गावित ने बीजेपी उम्मीदवार मोहन सूर्यवंशी को 7 हजार मतों से हराया था.

शिवसेना को अभी तक छोटे दल और निर्दलीय मिलकार कुल 6 विधायकों का समर्थन मिला. 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के अपने 56 विधायक चुनाव जीत कर आए है. लेकिन निर्दलियों के समर्थन से शिवसेना पास अभी 62 विधायक हो चुके है.

शिवसेना का समर्थन करने वाले 6 निर्दलीय विधायक

1) शंकरराव गडाख , निदर्लीय विधायक , नेवासा विधानसभा सीट ( जिला अहमदनगर)
2) आशिष जैसवाल , निर्दलीय विधायक , रामटेक विधानसभा सीट ( जिला नागपुर )
3) बच्चू कडू , निर्दलीय विधायक , अचलपूर , (जिला - अमरावती)
4) राजकुमार पटेल, निर्दलीय विधायक मेलघाट , (जिला- अमरावती)
5)आमदार नरेंद्र भोंडेकर, भंडारा विधानसभा सीट (जिला भंडारा)
6) मंजुला गावित , निदर्लीय विधायक , साक्री विधानसभा सीट (जिला धुले)

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महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी को जहां 105 सीटें मिली हैं, वहीं शिवसेना को 56 सीटों पर जीत मिली है. वहीं एनसीपी ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की है. विधानसभा चुनाव में गठबंधन के आधार पर मैदान में उतरने वाली शिवसेना और बीजेपी के बीच अभी भी सीएम को लेकर पेंच फंसा हुआ है. शिवसेना कह रही है कि 50-50 के फार्मूले के तहत दोनों पार्टियों को सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए. वहीं बीजेपी का कहना है कि पहले ही तय चुका था कि पांच साल तक बीजेपी का ही सीएम रहेगा.