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लिखना पढ़ना नहीं आता, फिर भी पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटी बच्चियां चला रही मुहिम

चूरू(Churu) के सरदारशहर(Sardarshahar) के वार्ड नंबर 12 और 14 की करीब दो दर्जन से ज्यादा छोटी-छोटी बच्चियों ने लोगों को प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक के लिए लोगों को जागरूक कर रही है.

लिखना पढ़ना नहीं आता, फिर भी पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटी बच्चियां चला रही मुहिम
छोटी बच्चियां का ये संदेश एक बड़ा क्रांति ला सकता है.

मनोज प्रजापत, चुरू: इंसान ने अपनी सुविधा और सहूलियत के लिए प्लास्टिक को जीवन का हिस्सा बना लिया है, लेकिन यह प्लास्टिक एक दिन मानव जीवन के लिए बहुत बड़ा अभिशाप बन जाएगा.

केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर से सिंगल यूज प्लास्टिक पर भले ही बैन लगा दिया है. लेकिन अभी भी इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है. प्लास्टिक के कचरे से गंभीर पर्यावरण संकट उत्पन्न हो रहा है. वहीं, लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहा है.

ऐसे में चूरू(Churu) के सरदारशहर(Sardarshahar) के वार्ड नंबर 12 और 14 की करीब दो दर्जन से ज्यादा छोटी-छोटी बच्चियों ने लोगों को प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक के लिए लोगों को जागरूक कर रही है. अपने घरों में, मोहल्लों में, गलियों में, दुकानों में पोस्टर के जरिए टूटी फूटी लिखावट में पर्यावरण बचाने के लिए सबसे बड़ा संदेश दे रही है.

ये बच्चियों अपने पापा से कह रही है, पापा घर में प्लास्टिक मत लाना, दुकानदार से कह रही है, प्लास्टिक खतरनाक है. मोहल्ले में घर-घर जाकर लोगों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संदेश दे रही है. छोटी बच्चियां का ये संदेश एक बड़ा क्रांति ला सकता है.

दिवाली पर रंग बिरंगी रंगोली के बीच ये बच्चियों पर्यावरण को बचाने के लिए पूरे विश्व को संदेश दे रही हैं. बच्चियों के इस प्रयास की काफी सराहना मिल रही है और इसका असर भी धीरे-धीरे जमीन पर दिखना शुरू हो गया है. बच्चों के आग्रह पर इनके परिवार के सदस्यों ने भी अब कपड़े के थैले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.

जनभागीदारी से मिल सकते कामयाबी
जनभागीदारी से ही हम पॉलिथिन मुक्त देश की तरफ बढ़ सकते हैं. कानून द्वारा प्रतिबंधित करना या उपयोग करने पर जुर्माना लगाना इसका समुचित हल नहीं है.

लोगों को इसके लिए खुद से आगे आना होगा, और यह तभी सम्भव होगा जब वो इसके प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को समझेंगे और जानेंगे. यह लक्ष्य मुश्किल हो सकता है, लेकिन असम्भव नहीं.

इसे साबित किया है सिक्किम राज्य के लोगों ने. सिक्किम में लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल करने पर जुर्माना ना लगाकर बल्कि उससे होने वाली बीमारियों के बारे में अवगत कराया गया और धीरे धीरे जब लोगों ने स्वेच्छा से इसका प्रयोग कम कर लिया तो राज्य में कानून बनाकर इसे प्रतिबंधित किया गया और सिक्किम भारत का पहला राज्य बना जिसने प्लास्टिक से बनी डिस्पोजल बैग और सिंगल यूज़ प्लास्टिक की बोतलों पर बैन लगाया.

पॉलिथीन के खतरे को जानने के बावजूद इसे रोकने के लिए कहीं ना कहीं से तो शुरुआत करनी होगी. इन बिटिया ने अपने घर से, मोहल्ले से इसकी शुरूआत कर दी, जिसका संदेश बहुत दूर तक जाएगा.

WRITTEN BY- SUJIT KUMAR NIRANJAN