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झुंझुनूं: बारिश की वजह से रूक गई शादी, दूल्हे को करना पड़ा लंबा इंतजार

आपने शादियां तो खूब देखी और सुनीं होगी. लेकिन बिगड़ती शादी का नजारा आपको हम बताने जा रहे है. यह वाक्या राजस्थान के झुंझुनूं जिले का है.

झुंझुनूं: बारिश की वजह से रूक गई शादी, दूल्हे को करना पड़ा लंबा इंतजार

संदीप केडिया, झुंझुनूं: कहते है नियती को कोई नहीं टाल सकता. जिस निकाह (Nikah) को दो महीने पहले केवल इसलिए टाल दिया गया था कि बारिश का मौसम था. उसी निकाह के दिन एक महीने बाद बादल ऐसे बरसे कि निकाह को प्रभावित किया. दुल्हने फूलों की सेज की बजाय, पानी को पार करते हुए पड़ोसी के घर ठहरी तो काजी साहब भी पानी में पायजामा ऊपर कर निकाह करवाने पहुंचे. इस दौरान दूल्हे को भी 4 घंटे तक मस्जिद (Mosque) में इंतजार करना पड़ा

आपने शादियां तो खूब देखी और सुनीं होगी. लेकिन बिगड़ती शादी का नजारा आपको हम बताने जा रहे है. यह वाक्या राजस्थान के झुंझुनूं जिले(Jhunjhunu) का है.

जी हां, यहां दो बेटियों की शादी दो माह पहले इसलिए टाल दी गई थी कि बारिश के मौसम था. लेकिन वो ही होता है, जो मंजूरे खुदा होता है. दो महीने बाद भी शादी हुई तो बारिश बैरन बनकर गिर ही गई. करीब एक महीने बाद एक घंटे तक झुंझुनूं में बरसे मेघ ने गर्मी से राहत तो दी. लेकिन एक शादी का मजा किरकिरा कर दिया.

जानिए पूरी कहानी
झुंझुनूं के मिल्लत नगर में रासबि लीलगर की दो बेटियों की शादी थी. एक बारात सीकर और दूसरी बारात बिसाऊ से आई थी. दावत की तैयारी चल रही थी. वहीं काजी जावेद भी निकाह करवाने के लिए मस्जिद में पहुंच गए थे. लेकिन अचानक ही शुरू हुई बारिश के कारण सब तैयारियां धरी की धरी रह गई. विवाह स्थल पर चार से पांच फुट तक पानी जमा हो गया. जिसके कारण ना केवल दावत का सामान खराब हो गया. बल्कि शादी का सामान भी बह गया.

प्रशासन को मिली खबर और फिर...
इस निकाह में आई रूकावट की खबर जब प्रशासन के पास पहुंची तो अधिकारियों को मौके पर भेजा गया. पटवारी दिलीपकुमार के नेतृत्व व निर्देशन में आयोजन स्थल पर जमा पानी निकलवाया गया. तो कुछ राहत की सांस ली. लेकिन इस पानी को पूरा तो नहीं निकाला जा सका. थोड़ा पानी उतरा तो निकाह के तय समय से करीब चार-पांच घंटे बाद काजी जावेद मस्जिद से निकले और पानी को चिरते हुए दुल्हनों के पास निकाह करवाने के लिए पहुंचे.

बाराती दुल्हन का करते रहे इंतजार
सीकर और बिसाऊ से आए बाराती दुल्हन को ले जाने के लिए इंतजार करते रहे. वहीं दावत का सामान खराब होने के कारण उन्हें देर तक खाना भी नहीं मिला. साथ ही शादी की खुशियों में भी खलल पड़ गया. लेकिन बारिश के कारण जहां लोगों को राहत मिली थी. वहीं रासिब के परिवार के साथ-साथ बिसाऊ और सीकर से आए बारातियों को कितनी परेशानियां हुई. वो वे ही जान सकते है.

नगर परिषद झुंझुनूं पर खड़ा हो रहा सवाल
बहरहाल, ये कहानी दिलचस्प तो है. लेकिन जिन तीन परिवारों के साथ-साथ उनके सगे संबंधियों और जानकारों को परेशानी हुई. उसे बयां नहीं किया जा सकता. साथ ही एक घंटे की बारिश के बाद बिगड़े हालातों के बाद प्रशासनिक तैयारियों और नगर परिषद झुंझुनूं की चुस्ती पर भी सवाल उठना लाजमी है. अब देखने वाली बात यह है कि इतनी शर्मनाक तस्वीरों के बाद भी कोई पुख्ता और स्थायी समाधान के लिए कदम उठाया जाता है या फिर नहीं.