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पंचकुला के जगदीश को देख याद आ जाते हैं भगत सिंह, शहीद-ए-आजम के परिवार से भी है रिश्ता

पंचकूला में एक 63 वर्षीय व्यक्ति जगदीश भगत सिंह ने अपनी वेश भूषा और रहन-सहन पिछले तीस साल से शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) को समर्पित कर रखा है. 

पंचकुला के जगदीश को देख याद आ जाते हैं भगत सिंह, शहीद-ए-आजम के परिवार से भी है रिश्ता
शहीद-ए-आजम के परिवार के साथ जगदीश भगत सिंह

चंडीगढ़: देश को आजाद करवाने के लिए कुर्बानियां देने वाले महान वीर सपूतों को बेशक आज हम भूलते जा रहे हैं मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हमेशा अपने दिल में उनकी याद ताजा रखते हैं. पंचकुला में एक 63 वर्षीय व्यक्ति जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपनी वेश भूषा और रहन-सहन पिछले तीस साल से शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) को समर्पित कर रखा है. यहां तक कि उन्होंने अपने नाम जगदीश सिंह के साथ भी भगत सिंह (Bhagat Singh) जोड़ कर अपना नाम जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) रख लिया है. जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपने जीवन में शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) को समर्पित यह बदलाव इस मकसद से किया है ताकि उनको देख कर लोगों को शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) की याद और उनकी कुर्बानी याद आए.

पंचकुला में रहने वाले व्यत्कि जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) को देखते ही शहीद-ए-आजम भगत सिंह (Bhagat Singh) की याद ताजा हो जाती है. जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपना रहन-सहन और नाम शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) को समर्पित कर दिया है. 63 वर्षीय जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने बताया कि पिछले तीस साल से वे केवल शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) की वेश भूषा जैसी वेश भूषा ही पहनते हैं और इन्होंने अपने नाम जगदीश सिंह के साथ भी 'भगत' जोड़ लिया है.

बिजली विभाग से सेवानिवृत्त जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने बताया कि बचपन से ही वे शहीद भगत से काफी प्रभावित थे और ज्यों-ज्यों बड़े हुए तो भगत सिंह (Bhagat Singh) के बारे में और भी ज्यादा पढ़ने को मिला. जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) के अनुसार उनको इस बात का दुःख होता था कि युवा पीढ़ी भगत सिंह (Bhagat Singh) जैसे देश भक्तों को भूलती जा रही है. इसीलिए जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने तीस साल पहले यह भगत सिंह (Bhagat Singh) जैसी वेश भूषा में रहना शुरू कर दिया ताकि उनको देख कर लोगों को शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) और उनकी कुर्बानी याद आए. लोगों में जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) की पहचान भगत सिंह (Bhagat Singh) के रूप में होने लगी तो इन्होंने अपने नाम जगदीश के साथ भगत सिंह (Bhagat Singh) जोड़कर अपना नाम जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) रख लिया.

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जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) के अनुसार वे अक्सर इलेक्ट्रिक बाइक पर सफर करते हैं क्योंकि इलेक्ट्रिक बाइक पर हेलमेट की जरूरत नहीं पड़ती और इसलिए उनको भगत सिंह (Bhagat Singh) वाला हैट भी सिर से उतारना नहीं पड़ता. जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) ने बताया कि उनके इसी जूनून ने शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) के परिवार के साथ भी रिश्ते कायम कर दिए हैं. जगदीश भग्त सिंह के अनुसार कई साल पहले जब जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) के भाई कुलतार सिंह चंडीगढ़ पीजीआई में दाखिल हुए थे और तब जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) की उनसे मुलाकात हुई और इसके बाद से शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) के परिवार के साथ जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) के अच्छे रिश्ते हो गए.

जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) के अनुसार वो शहीद भगत की याद से जुड़े हर स्थान पर आते जाते हैं और अब हर साल शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) की याद में एक बड़ा कार्यक्रम भी करवाते हैं. इसके लिए इन्होंने शहीद भग्त सिंह जागृति मंच के नाम से संस्था बनाई हुई है. भगत सिंह (Bhagat Singh) से जुड़े कार्यक्रमों में दूर दूर से भी जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) को निमंत्रण आते हैं. बहरहाल जगदीश भगत सिंह (Bhagat Singh) का यह जुनून देश पर कुर्बान हुए वीर सपूतों की याद दिलाने में सहायक हो ना हो मगर उनको देख कर शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) की याद जरूर ताजा हो जाती है.