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जयपुर: आरसीए में शुरु हुआ चुनावी घमासान, असमंजस में वोटर्स

आरसीए में चुनावों की घोषणा के बाद घमासान शुरू हो चुका है. दोनों गुट अपनी-अपनी रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं. 

जयपुर: आरसीए में शुरु हुआ चुनावी घमासान, असमंजस में वोटर्स
अब आरसीए तीन चुनावी तिथियों के बीच में फंस गया है.

जयपुर: आरसीए चुनावों की घोषणा के साथ ही आरसीए में घमासान शुरू हो चुका है. दोनों गुट चुनावों की घोषणा के बाद अपनी-अपनी रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं. सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को आरसीए के ताज तक पहुंचाने के लिए जोशी गुट जोर आजमाइश कर रहा है. वहीं, दूसरी ओर रामेश्वर डूडी का ग्रुप भी अपनी चुनावी तैयारी तेज कर रहा है. लेकिन दोनों के बीच एक चुनाव पर सहमति में मतदाता सूची रोड़ा बन रही है. इस मतदाता सूची में आठ जिला संघों के विवाद के कारण चुनाव एक मत पर नहीं पहुंच रहे है.

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में इतने विवाद हैं कि अब इसको कंट्रोवर्सी एसोसिएशन भी कहा जाने लगा है. वहीं, आरसीए में अब नया विवाद शुरू हो गया है. आरसीए में अध्यक्ष और सचिव के बीच लम्बे समय से चल रहा विवाद अब कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के बीच पहुंच गया है. जहां एक गुट को अध्यक्ष सीपी जोशी नेतृत्व कर रहे हैं तो दूसरी ओर नांदू गुट को अब रामेश्वर डूडी का नेतृत्व मिला है. इसी के चलते अब आरसीए में दो गुटों की चुनावी तिथि के साथ ही चुनाव अधिकारी ने भी चुनावों की नई तिथि घोषित की. जिसके चलते अब आरसीए तीन चुनावी तिथियों के बीच में फंस गया है.

रामेश्वर डूडी और सीपी जोशी गुटों में बंटे आरसीए में दो-दो चुनाव की घोषणा हो चुकी है. पहले डूडी गुट ने अपना चुनाव अधिकारी टीएस कृष्णमूर्ति को बनाकर 22 सितंबर के चुनाव की घोषणा की. तब बीसीसीआई की सीओए ने चुनाव अधिकारी कृष्णमूर्ति को अधिकृत कर दिया और उनसे निर्गुट एक चुनाव का आह्वान किया. इस पर कृष्णमूर्ति ने 27 सितम्बर को चुनाव कराने की घोषणा कर संशोधित कार्यक्रम जारी किया. लेकिन साथ ही चुनाव अधिकारी ने मतदाता सूची को बरकरार रखा गया. जिस पर जोशी गुट ने आपत्ति जताते हुए इसे नहीं मानकर अपना अलग चुनावी कार्यक्रम 4 अक्टूबर का जारी कर दिया. इसमें भी उन्होंने कृष्णमूर्ति को अपना चुनाव अधिकारी बताया, लेकिन अलग से अपनी मतदाता सूची जारी की. साथ ही सहायक चुनाव अधिकारी महावीर प्रसाद शर्मा को बनाया. हालांकि इसके पीछे स्पोटर्स एक्ट का हवाला दिया गया.

आरसीए चुनावों की मतदाता सूची में वैसे तो 35 जिला संघों के सचिव मतदाता है. जिनमें से 27 मतदाताओं पर दोनो गुटों की सहमति हैं. मतलब दोनों गुटों की सूची में 27 जिला संघों के नाम समान है. लेकिन बात की जाए अगर अजमेर, दौसा, डूंगरपुर, पाली, सवाईमाधोपुर, श्रीगंगानगर और टोंक जिला संघों की तो यहां पर दोनों ही गुटों की मतदाता सूची में अलग-अलग नाम होने की वजह से विवाद खड़ा हो रहा है.

सीपी जोशी गुट ने अलवर, अजमेर, दौसा,श्रीगंगानगर में नए चुनाव के बाद अपने वोटर्स की सूची जारी करने का दावा किया है तो पाली और टोंक में गलत तरीके से चुनाव करवाने के आरोपी भी दूसरे गुट पर लगाए हैं. इसके साथ ही डूंगरपुर में एडहॉक कमेटी और सवाईमाधोपुर, टोंक में विवाद की स्थिति के कारण उन्होंने अपने नाम जारी किए है. जोशी गुट का यह भी आरोप है कि आरएस नांदू ने राजसमंद डीसीए में कोषाध्यक्ष पद पर प्रदी पालीवाल को सूची में शामिल किया है. जबकि उनका निधन हो चुका है. ऐसे में उस पद पर वैभव गहलोत को निर्वाचित किया गया है. दूसरी ओर आरएस नांदू गुट ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है.

बहरहाल, आरसीए में जारी विवादों की घमासान के बीच आपसी सहमति से लेकर भले ही कई तरह की चर्चाएं जोर पकड़ रही हो. लेकिन चुनावी घमासान में उतरने के बाद दोनों गुटों के लिए ये विवाद 8 जिला संघ समीकरण बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं. ऐसे में अब वोटर लिस्ट पर होने वाली सुनवाई में भी इन 8 जिला संघों पर घमासान देखने को मिल सकता है.