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जयपुर: रजिस्ट्री से आय बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करने में पीछे हुए उप-पंजीयन कार्यालय

अब 2019-20 में विभाग की ओर से लक्ष्य को हासिल करने की तैयारी की जा रही है. लेकिन हाल ही बढ़ी डीएलस रेट और फिर श्राद्ध पक्ष लगने के बाद कार्यालयों में ना के बराबर रजिस्ट्री हो रही हैं. 

जयपुर: रजिस्ट्री से आय बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करने में पीछे हुए उप-पंजीयन कार्यालय
बाजार में मंदी है और दस्तावेज के साथ जितनी आय होनी चाहिए उतनी नहीं हो रही है.

जयपुर: राजस्व अर्जित करने वाले प्रमुख विभागों में एक मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप आय प्राप्त करने में पसीने छुट गए हैं. आम तौर पर राजस्व प्राप्ति की लक्ष्य प्रति वर्ष वृद्धि दर्ज की जाती है, लेकिन जयपुर में मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग लक्ष्य पूरा करना तो दूर 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में कमाई में पीछे रह गया, हालांकि, लक्ष्य पूरा नहीं करने के पीछे तमाम तरह के कारण है, नोटबंदी से लेकर कई स्थानीय कारणों की वजह से राजस्व की वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका.

वहीं, श्राद्ध पक्ष में सूने पड़े उपपंजीयन कार्यालयों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है. कारण है कि लक्ष्य हासिल करने में विभाग पहले ही पीछे चल रहा है. जयपुर जिले के तीनों उपपंजीयन कार्यालयों में पिछले तीन सालों के आंकड़ों को देखें तो रजिस्ट्री से आय तो बढ़ रही है. लेकिन निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं करने में पीछे रह गया है. 2017-18 में उपपंजीयन प्रथम, द्वितीय और तृतीय की आय जहां 988 करोड़ रुपए हुई. जबकि 2018-19 में बढ़कर 1037 करोड़ हो गई, लेकिन खास बात है कि लक्ष्य घट गए.

वहीं, 2017-18 में जहां डीआईजी प्रथम ने 78.68 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया, वह 2018-19 में घटकर 64 प्रतिशत पर आ गया. यही हाल शेष दो कार्यालयों का है. ऐसे में अब 2019-20 में विभाग की ओर से लक्ष्य को हासिल करने की तैयारी की जा रही है. लेकिन हाल ही बढ़ी डीएलस रेट और फिर श्राद्ध पक्ष लगने के बाद कार्यालयों में ना के बराबर रजिस्ट्री हो रही हैं. अभी की बात करें तो जहां औसतन 50 रजिस्ट्री रोज हो रही थी, उनकी संख्या घटकर 5 ही रह गई है.

पंजीयन विभाग को नोटबंदी के निर्णय से लगा तगड़ा झटका अब भी बरकरार है. विभाग के कमाई के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं.जानकारों का कहना है कि सरकार हर साल मनमर्जी के लक्ष्य देती है. जिसे अर्जित करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं करने का तर्क यही दिया जाता है. बाजार में मंदी है और दस्तावेज के साथ जितनी आय होनी चाहिए उतनी नहीं हो रही है.