सत्यपाल मलिक ने कहा, 'कश्मीर के नेता जनता को बरगलाते हैं, खुद के बच्चे आतंक के रास्ते पर नहीं भेजते'

उन्होंने कहा, 'जितने भी यहां सोसाइटी, रिलीजन, हुर्रियत और मुख्यधारा के नेता कहे जाते हैं, ये दूसरों को कॉल दे कर मरवाते हैं. इसमें किसी का बच्चा नहीं मरा है, किसी का बच्चा आतंकवाद में नहीं है. आम आदमी को जन्नत का रास्ता दिखाइए और मरवा दीजिए, ये होता रहा है.'

सत्यपाल मलिक ने कहा, 'कश्मीर के नेता जनता को बरगलाते हैं, खुद के बच्चे आतंक के रास्ते पर नहीं भेजते'

जम्मू: जम्मू कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णों देवी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पहुंचे राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने छात्रों को शिक्षा की अहमियत बताते हुए उन्हें किसी भी गलत रास्ते पर ना जाने की सलाह दी. उन्होंने कहा, 'जितने भी यहां सोसाइटी, रिलीजन, हुर्रियत और मुख्यधारा के नेता कहे जाते हैं, ये दूसरों को कॉल दे कर मरवाते हैं. इसमें किसी का बच्चा नहीं मरा है, किसी का बच्चा आतंकवाद में नहीं है. आम आदमी को जन्नत का रास्ता दिखाइए और मरवा दीजिए, ये होता रहा है.'

कश्मीर के नेताओं पर किया वार
राज्यपाल ने कहा,'शिक्षा इतनी महत्वपूर्ण कि जिस देश ने तरक्की की एजुकेशन से की टूटे पुल, सड़क दोबारा बन सकते हैं लेकिन अगर एक जनरेशन बर्बाद हो जाए तो उसको दोबारा खड़ा नहीं कर सकते. पिछले हफ्ते एक जज साहब ने बताया की गांव का हूं और पढाई की वजह से यहां पहुंचा हूं. आप लोग दूर की सोचो, कोई भी चीज इम्पॉसिबल नहीं है. हमारे यहां जो बड़े लोग हैं, वो एजुकेशन को एक धेला देने को तैयार नहीं है. 14 तल्ले के माकन में रहते हैं, एक तल्ले पर कुत्ते हैं,  एक तल्ले पर गाड़िया है,  एक तल्ले पर नौकर हैं,  पर एक धेला एजुकेशन के लिए नहीं देते और में कहता हूं कि ये खत्म हो चुके लोग हैं.'

गवर्नर सत्यपाल मलिक ने कहा, 'जम्मू कश्मीर के 22 हजार बच्चे यहां से बाहर पढ़ते हैं. दिल्ली से इतना पैसा यहां आया कि अगर ढंग से खर्च होता तो आपके घर की छत सोने की होती, पर यहां के नेता है इनके घर यहां है, दिल्ली में हैं, फ्रांस में है बड़े बड़े रेस्टोरेंट में खाते हैं. मैं अमरनाथ गया तो वहां बच्चे जो टट्टू चलाते है उनके पास स्वेटर नहीं है. 582 लोगों को हक से वंचित कर दिया और दूसरे लोगों को बैठा दिया. मैंने इसको सही किया और 582 बच्चों को भर्ती किया.'

बच्चों को स्कूलों में दी जाती थी जिहाद की शिक्षा
सत्यपाल मलिक ने कहा, 'यहां के नेताओं ने, ब्यूरोक्रेट्स ने यहां के लोगों का सपना तोड़ा है. जितने यहां के लीडर्स है सबके बच्चे बाहर पढ़ रहे है और यहां के बच्चे को जन्नत का रास्ता दिखाते है और कहते है की जान दो. जो इंटेलिजेंस एजेंसी है वो सच नहीं बताते हैं.  न दिल्ली को, न हमको मैं यहां आया तो पता किया कि कितने स्कूल में राष्ट्रगान सिखाया जाता है और मुझे पता लगा की बच्चों को जान देने की तालीम दी जाती है और जन्नत जाने का रास्ता वही है यही बताया जाता है. मैं गवर्नर हूं बहुत कमजोर हूं बोलने में, कुछ ऐसा निकल जाता है जिसकी वजह से 3 दिन तक मुझे दिल्ली जवाब देना पड़ता है.'