close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

झालावाड़: स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर जाने को मजबूर छात्र, प्रशासन नहीं ले रहा सुध

मामले की शिकायत ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन से भी की लेकिन पंचायत सरपंच के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं. 

झालावाड़: स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर जाने को मजबूर छात्र, प्रशासन नहीं ले रहा सुध
प्रतीकात्मक तस्वीर

महेश परिहार, झालावाड़: जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव के छात्र स्कूल जाने के लिए कीचड़ भरी राह से गुजरने को मजबूर हैं. हालात यह है कि स्कूल पर पहुंचते-पहुंचते छात्र कई बार कीचड़ और गंदगी में फिसल कर चोटिल भी हो चुके हैं लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा हैं.

झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के रतनपुरा विद्यालय के नन्हें छात्र अपने गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर स्कूल तक पहुंचने के लिए कीचड़ भरी डगर से होकर गुजरते हैं. दलदल से भरे इस मार्ग से होकर छात्रों को विद्यालय तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है. हालात बारिश के दिनों में तो और ज्यादा दूभर हो जाते हैं जब इस मार्ग पर जलभराव भी हो जाता है और उस दौरान जहरीले जीवों का भी खतरा बढ़ जाता है.

रतनपुरा के ग्रामीणों ने बताया कि करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रतनपुरा तक जाने के लिए गांव के छात्रों को कीचड़ और दलदल की मुश्किलों से भरे रास्ते से होकर पहुंचना होता है. जिसमें न केवल बच्चों की पोशाक खराब हो जाती है बल्कि कई बार छात्र फिसल कर चोटिल भी हो चुके हैं. यह परेशानी नन्हे छात्रों के साथ ही रतनपुरा के ग्रामीणों को भी उठानी पड़ रही है क्योंकि यह गांव का मुख्य मार्ग भी है जहां प्रतिदिन दर्जनों लोगों को गुजरना पड़ता है.

मामले की शिकायत ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन से भी की लेकिन पंचायत सरपंच के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं. उधर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रतनपुरा के प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में करीब 200 छात्रों का प्रवेश है लेकिन वर्तमान में डेढ़ सौ छात्र भी अध्ययन के लिए नहीं पहुंच रहे. करीब 5 दर्जन छात्रों के परिजनों ने टीसी निकलवा कर उन्हें अन्य विद्यालयों में पढ़ने भेज दिया. ऐसे में छात्रों की विद्यालय में संख्या लगातार कम होती जा रही है. यदि प्रशासन ने समय पर कोई कदम नहीं उठाया तो विद्यालय में सिर्फ अध्यापक ही पहुंचेंगे छात्र नहीं.