एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में आई बहार लेकिन देखने वाला कोई नहीं, 100 करोड़ के नुकसान का अनुमान

हर साल लाखों की संख्या में लोग इस गार्डन की सुंदरता से आकर्षित होकर खींचे चले आते हैं.

एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में आई बहार लेकिन देखने वाला कोई नहीं, 100 करोड़ के नुकसान का अनुमान
फाइल फोटो

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) का मशहूर ट्यूलिप गार्डन (Tulip Garden) अपनी सुंदरता से लाखों लोगों को आकर्षित करने के लिए तैयार है. हर साल लाखों की संख्या में लोग इस गार्डन की सुंदरता से आकर्षित होकर खींचे चले आते हैं. लेकिन देश में आए कोरोना काल (Coronavirus) के कारण इस गार्डन में खिले फूलों का रंग फीका सा पड़ गया है.

श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील के किनारे स्थित ट्यूलिन गार्डन 27 मार्च से खुलने वाला था. गार्डन में घूमने आने वालों लोगों के लिए इस बार यहां 13 लाख ट्यूलिप प्रदर्शित करने की तैयारियां की गई थी. लेकिन इन सारी तैयारियों पर कोविड-19 का साया पड़ गया है. मंदी की मार झेल रहे कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को इस बगीचे के खुलने से कुछ राहत की उम्मीद थी, लेकिन वो भी कोरोना के कारण उन्हें में भी बड़ा झटका लगा है. 

एक अनुमान के मुताबिक ट्यूलिप बाग और इसके सभी संबद्ध क्षेत्रों में लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. जिसमें पर्यटन से जुड़े शिकारा वाले, हाऊसबोट मालिक, होटल मालिक भी शामिल हैं. जानकारों की मानें तो ट्यूलिप बगीचे के रखरखाव और बल्बों को लगाने के लिए करीब 60 लाख रुपये का खर्चा आता है. बता दें कि ये गार्डन 40 दिन के लिए खुलता है.

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फलोरिकल्चर अधिकारी ने बताया कि हमें पहले से तैयारी की थी. इस वर्ष जापान की तर्ज पर 'चेरी गार्डन थीम' पर इस बाग को सजाया था ताकि बाग ज्यादा लुभावना बने. विभिन प्रकार के करीब 13 लाख ट्यूलिप बल्बों को लगाया गया था जिनमें से 55 तरह के ट्यूलिप थे. इसके अलावा इस बार चार नयी ट्यूलिप किस्मों को ऐड किया गया था. उन्हें उम्मीद थी कि पिछले साल के मुकाबले इस बार पर्यटक ज्यादा आएंगे. 

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले साल 3.5 लाख पर्यटक आए थे. लेकिन इस बार 4 लाख पर्यटकों के आने की उम्मीद थी. लेकिन कोरोना वायरस के कारण ये उम्मीद टुट गई. उन्होंने बताया कि ट्यूलिप बाग कर्मचारियों के अलावा हाउसबोट, शिकारा वाले, टूर ऑपरेटर, कैब ड्राइवर, होटल व्यवसायी और ट्यूलिप गार्डन से जुड़े कई अन्य क्षेत्रों में भी इस जुड़े रहते थे, जिन पर इसका असर पड़ा है.

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