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जोधपुर: हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा पाली में की जाएगी स्थापित

गौरतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजो की ओर से जोधपुर रियासत की सेना ने भी हिस्सा लिया था. इतिहास में इस लड़ाई को हाइफा की लड़ाई के नाम से जाना जाता है.

जोधपुर: हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा पाली में की जाएगी स्थापित
प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजो की ओर से जोधपुर रियासत की सेना ने भी हिस्सा लिया था.

जोधपुर: प्रथम विश्व युद्ध में भाजपा की लड़ाई के हीरो रहे राजस्थान के जोधपुर रियासत के सेनापति मेजर दलपत सिंह की प्रतिमा अब पाली में लगाई जाएगी. जयपुर के मुर्तिकार महावीर भारती और डिजायनर निर्मला कुल्हरी ने 8 फीट ऊंची और 500 किलो वजनी प्रतिमा तैयार कर ली है. मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि प्रतिमा में हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह को अपनी दो धारी तलवार के साथ विजेता की मुद्रा में दिखाया गया है. 

इस पोज की प्रतिमा अभी तक नहीं बनी है. रावणा राजपूत समाज की तरफ से यह प्रतिमा पाली जोधपुर हाईवे 65 के पास पाली शहर में प्रवेश करने के तिराहे पर स्थापित की जाएगी. जिसका अनावरण हाइफा डे 23 सितंबर को किया जाएगा. प्रतिमा अष्ठधातु में बनी है. इसको तैयार करने और जीवंत रूप देने में 3 महीने का समय लगा है. मुर्तिकार महावीर भारती ने यह बताया कि इस प्रोजेक्ट के बाद पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा और राजस्थान की सबसे बड़ी तलवार को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

गौरतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजो की ओर से जोधपुर रियासत की सेना ने भी हिस्सा लिया था. इतिहास में इस लड़ाई को हाइफा की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. हाइफा की लड़ाई 23 सितंबर 1918 को लड़ी गई थी. इस लड़ाई में राजपूता ने सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने किया. अंग्रेजो ने जोधपुर रियासत की सेना को हाइफा पर कब्जा करने के आदेश दिए थे. जिसके बाद यह राजस्थानी रणबांकुरो की सेना दुश्मन को खत्म करने और हाइफा पर कब्जा करने के लिए आगे की ओर बढ़ी लेकिन तभी अंग्रेजो को यह मालूम चला की दुश्मन के पास बंदूके और मशीन गन है जबकि जोधपुर रियासत की सेना घोड़ो पर तलवार और भालो से लड़ने वाली थी. 

इसी वजह से अंग्रेजो ने जोधपुर रियासत की सेना वापस लौटने के आदेश दिया लेकिन जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने कहा की हमारे यहां वापस लौटने का कोई रिवाज नहीं है. हम रणबांकुरे जो रण भूमि में उतरने के बाद या तो जीत हासिल करते है या फिर वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं. इस लड़ाई में जोधपुर की सेना के करीब नो सौ सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए. युद्ध का परिणाम ने एक अमर इतिहास लिख डाला. जो आज तक पूरे विश्व में कही नहीं देखने को मिला था. यह दुनिया का मात्र ऐसा युद्ध था जो तलवारों और बंदूकों के बीच हुआ. जीत जोधपुर रियासत की सेना को मिली. उन्होंने हाइफा पर कब्जा कर लिया और चार सौ साल पुराने ओटोमैन साम्राज्य का अंत हो गया.