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राजस्थान: पानी की कमी से जुझ रहे मरुधरा के बांध हुए लबालब, बदला नजारा

कभी मरुधरा पानी की एक एक बूंद के लिए तरस रही थी. लेकिन आज हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं.

राजस्थान: पानी की कमी से जुझ रहे मरुधरा के बांध हुए लबालब, बदला नजारा
मानसून के आने से बांधों की धारा में मुस्कुराहट आ गई. (फाइल फोटो)

जयपुर: एक वक्त था जब मरुधरा पानी की एक एक बूंद के लिए तरस रही थी, प्यास की शिद्दत से मरुधरा का गला सूख गया था, शहर दर शहर गांव दर गांव ढ़ाणी दर ढ़ाणी में पानी के लिए हाहाकार मचा था. 

लेकिन आज वक्त अलग है. मानसून से पहले सूखे पड़े राजस्थान के लिए मौसम अच्छी खबर थी बारिश की. लगातार हुई बारिश ने ना सिर्फ बांधों की सूरत बदली, बल्कि मिट्टी की हलक भी पानी से तरबतर कर दी, राजस्थान के 830 बांधों में से पिछले साल 95 फीसदी बांध पानी को तरस रहे थे, लेकिन अब 80 फीसदी बांध पूरी तरह से भर चुके हैं. तीन महीने हुई लगातार बारिश ने मरूधरा के बांधों को लबालब कर दिया है.

बीसलपुर बांध हो चुका है ओवरफ्लो
मानसून के आने से बांधों की धारा में मुस्कुराहट आ गई. हाल यह है कि जयपुर समेत 4 जिलों की लाइफलाइन कहा जाने वाला बीसलपुर बांध ओवरफ्लो हो रहा है.. राजस्थान के 22 बड़े बांधों में 95 फीसदी पानी आ चुका है. वहीं 4.25 एमक्यूएम से ज्यादा 280 बांधों में से 72 फीसदी बांध भर चुके है. जबकि 4.25 एमक्यूएम से छोटे 530 बांधों में 64 फीसदी पानी आ चुका है. 

इन जिलों को मिली है सुखे से निजात
अब जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चूरू और पाली को सूखे से निजात मिल चुकी है. ऐसे में अभी मानसून गया नहीं है, यानि इन बांधों में अभी और पानी की आवक हो सकती है. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि जो पानी बर्बाद हो रहा है, उसे सहेजने की भी जरूरत है. हालांकि पानी के सरंक्षण के लिए जलशक्ति मंत्रालय की ओर से चलाया जा रहा अभियान कितना कारगर साबित हो पाता है, ये तो अब अगले मानसून में ही पता लग पाएगा. 

Muzammil Ayyub, News Desk