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राजस्थान: जानिए परिवारवाद और वंशवाद पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की राय!

आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल(Hanuman Beniwal)ने अपने भाई की उम्मीदवारी घोषित की तो उसके बाद सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस(Congress)के परिवारवाद पर सवाल उठाने वाली बीजेपी के लिए अब आरएलपी का परिवारवाद स्वीकार्य होगा?

राजस्थान: जानिए परिवारवाद और वंशवाद पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की राय!
राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया. (फोटो साभार: Twitter)

जयपुर: भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) और राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी(RLP) में उप-चुनाव की दो सीटों के लिए गठबंधन हो गया है. इसके साथ ही आरएलपी ने खींवसर (Khinwsar Vidhansabha Seat)ने नारायण बेनीवाल(Narayan Beniwal)को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है.

आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल(Hanuman Beniwal)ने अपने भाई की उम्मीदवारी घोषित की तो उसके बाद सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस(Congress)के परिवारवाद पर सवाल उठाने वाली बीजेपी के लिए अब आरएलपी का परिवारवाद स्वीकार्य होगा?

विधानसभा उप-चुनाव के लिए हो चुका तालमेल
प्रदेश में विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव में राजनीतिक तालमेल हो चुका है. बीजेपी और आरएलपी में गठबंधन के बाद अब आरएलपी ने खींवसर से नारायण बेनीवाल को अपना प्रत्याशी घोषित भी कर दिया है. आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल ने अपने छोटे भाई नारायण बेनीवाल की उम्मीदवारी घोषित की.

क्या बीजेपी को बेनीवाल का परिवारवाद स्वीकार्य?
हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद ही परिवारवाद को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. सवाल इस बात का है कि अब तक कांग्रेस को परिवारवाद और वंशवाद के लिए घेरने वाली बीजेपी के लिए अब क्या हनुमान बेनीवाल का परिवारवाद स्वीकार्य होगा? 

जानिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की इस मुद्दे पर राय
इस पर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया कहते हैं कि ऐसा देश में पहली बार नहीं हुआ है. पूनिया ने कहा कि खींवसर में आरएलपी के जीतने की अच्छी संभावनाएं दिख रही थीं और पार्टी ने गठबंधन धर्म का सम्मान किया.

जानिए बीजेपी किस वंशवाद का करती है विरोध?
पूनिया कहते हैं कि वंशवाद की बात ज़रूर होती है लेकिन जनता जिन्हें चाहती है वे लोग चुनाव लड़ते रहे हैं. पूनिया ने कहा कि किसी पार्टी में शीर्ष पर कोई वंश बैठा है तो उसका विरोध है. उन्होंने कहा कि जो लोग परिवार की पार्टी चलाते हैं उनका भी विरोध है. पूनिया ने कहा कि बीजेपी किसी एक परिवार की पार्टी नहीं है. बल्कि बीजेपी तो खुद ही एक परिवार का का रूप है.

बीजेपी के परिवारवाद की परिभाषा!!!
दोनों परिवारवाद को अलग किस तरह किया जाएगा. यह सवाल आया तो पूनिया ने गांधी-नेहरू परिवार के कांग्रेस पर कब्जे की बात कही. उन्होंने कहा कि जिस तरह सोनिया गांधी और उनके वंश का कांग्रेस के शीर्ष पर कब्जा है, वह वंशवाद है.

उन्होंने कहा कि उनके वंशवाद और हमारे परिवारवाद में यही फर्क है कि बीजेपी में बंगारू लक्ष्मण, नितिन गडकरी, अमित शाह जैसा कोई भी सामान्य कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है.

राजनीतिक दलों को केवल जीत से मतलब
जिस तरह राजनीति में किसी एक परिवार के व्यक्ति को टिकट मिलने का यह पहला मौका नहीं है. ठीक उसी तरह ऐसे मामले की पैरवी का भी यह पहला वाकया नहीं है. राजनीति में परिवारवाद और वंशवाद बहस का विषय हो सकता है. लेकिन अगर किसी मुद्दे पर बहस नहीं है तो वह एकमात्र यही कि प्रत्याशी कोई भी हो. राजनीतिक पार्टी को सिर्फ और सिर्फ जीत से मतलब है.