#MahaExitPollOnZee: Exit Poll के सर्वे की मानें तो तेजस्‍वी बने बिहार के नेता!

ABP न्‍यूज-सी वोटर और Times Now के सर्वे में तो तेजस्‍वी यादव के नेतृत्‍व में विपक्षी महागठबंधन को एनडीए की तुलना में बढ़त मिलती दिख रही है. यदि ये रुझान 10 नवंबर को चुनाव परिणामों में तब्‍दील होते हैं तो ये चुनाव तेजस्‍वी यादव के बिहार के अगली पीढ़ी के नेता बनने के लिए भी याद किया जाएगा.

#MahaExitPollOnZee: Exit Poll के सर्वे की मानें तो तेजस्‍वी बने बिहार के नेता!
तेजस्‍वी यादव (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: बिहार चुनाव के तीसरे चरण के मतदान खत्‍म होने के बाद जारी हुए Exit Poll के तमाम सर्वे में इस बार सत्‍तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है. ABP न्‍यूज-सी वोटर और Times Now के सर्वे में तो तेजस्‍वी यादव के नेतृत्‍व में विपक्षी महागठबंधन को एनडीए की तुलना में बढ़त मिलती दिख रही है. यदि ये रुझान 10 नवंबर को चुनाव परिणामों में तब्‍दील होते हैं तो ये चुनाव तेजस्‍वी यादव के बिहार के अगली पीढ़ी के नेता बनने के लिए भी याद किया जाएगा.

इन Exit Poll से ये बात भी निकलकर आ रही है कि बिहार के इस विधानसभा चुनाव में तेजस्‍वी यादव हारें या जीतें ये दीगर बात होगी लेकिन एक अहम बात ये है कि तेजस्‍वी यादव, लालू के बेटे नहीं बल्कि एक राजनेता के तौर पर अपनी छवि बनाने में सफल रहे. अपनी पुरानी छवि से निकलना उनके भविष्‍य के लिए फायदेमंद ही साबित होगा. 

छवि बदलने की जी-तोड़ मेहनत 
तेजस्वी यादव ने इन चुनावों में कड़ी मेहनत की. ना केवल बिहार में दर्जनों रैलियां कीं बल्कि पढ़ाई-कमाई-सिंचाई जैसे मुद्दों को बिहार का मुख्य चुनावी मुद्दा बना दिया. जाहिर है ये वो उपलब्धियां हैं, जो एक खांटी राजनेता के लिए बहुत जरूरी होती हैं. 

इसके अलावा इन चुनावों को अपना आखिरी चुनाव बता कर और 'अंत भला तो सब भला' कहकर वोट मांग रहे मुख्‍यमंत्री नीतीश यादव के बाद राज्‍य को एक नई पीढ़ी का नेता भी मिल गया है. लोग तो उन्‍हें देश के लिए नई पीढ़ी का नेता भी कह रहे हैं. 

चुनाव हारे तो भी फायदे का सौदा 
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यदि तेजस्वी चुनाव नहीं जीते तो भी उनके लिए ये चुनाव फायदे का सौदा ही रहेंगे. उनकी मेहनत ने उन्‍हें बिहार में एक मजबूत विकल्‍प के तौर पर पेश किया है. इतना ही नहीं लोग इस  विकल्‍प को उनके माता-पिता राबड़ी-लालू की गलतियों से इतर जाकर देख रहे हैं. 

तेजस्वी की चुनावी समझ भी अच्‍छी कही जा सकती है. उनके पिता लालू यादव ने सामाजिक न्याय की बात कर राज्‍य में 15 साल शासन किया, वहीं तेजस्‍वी मौजूदा हालात देख कर आर्थिक न्याय की बात कर रहे हैं. 

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नौसिखिया से बने माहिर खिलाड़ी 
इन चुनावों में तेजस्‍वी की रणनीति किसी नौसिखिये जैसी नहीं बल्कि राजनीति के माहिर खिलाड़ी जैसी रही. उन्‍होंने बीजेपी या प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे हमले करने की गलती नहीं की. उनका निशाना हमेशा नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ही रहे. भारत-पाकिस्‍तान, अयोध्‍या जैसे राष्‍ट्रीय मुद्दों से किनारा करके बिहार के लोगों से बिहार की ही बात की और उन्‍हीं की जरूरतों से जुड़े मुद्दे उठाए. 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तेजस्‍वी ने रोजगार का मुद्दा बार-बार उठाया जो बिहार के लोगों को उनसे सीधे जोड़ता है. उस पर भी सरकारी नौकरी की बात करके तो उन्‍हें बिहारियों का दिल छू लिया. ये वो चीजें हैं जो आने वाले समय में उन्‍हें और मजबूती देंगी. 

हालांकि पहले नहीं था ऐसा माहौल 
बिहार चुनावों में तेजस्‍वी को लेकर इतना सकारात्‍मक माहौल पहले नहीं था, लोगों ने उन्‍हें धीरे-धीरे स्‍वीकार किया है. महागठबंधन के पोस्‍टरों में तेजस्‍वी छाए रहे. जबकि एनडीए की ओर से घोषित उम्‍मीदवार होने के बाद भी नीतीश कुमार को बीजेपी के पोस्टरों में जगह नहीं मिली. इसके अलावा मुद्दों को लेकर भी एनडीए में खींचतान दिखी जबकि तेजस्‍वी ने इसके बनिस्‍बत महागठबंधन को संभाले रखा. 

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