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जानिए, बसपा के 6 विधायकों ने क्यों थामा कांग्रेस का हाथ, क्या हुई डील?

2008 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में फिर से बसपा विधायकों के इस तरह दूसरे दल में जाने का घटनाक्रम दोहराया गया है. लेकिन सियासी गलियारों में कई तरह की बातें चर्चा में हैं.

जानिए, बसपा के 6 विधायकों ने क्यों थामा कांग्रेस का हाथ, क्या हुई डील?
सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या यह सारा घटनाक्रम बिल्कुल सामान्य है?

जयपुर: प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के टिकट पर चुनाव जीते सभी 6 विधायक एक बार फिर बसपा के लिए पराये हो गए हैं. इन विधायकों ने कांग्रेस(Congress) का हाथ थाम लिया है. लेकिन सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या यह सारा घटनाक्रम बिल्कुल सामान्य है? क्या इन लोगों ने निस्वार्थ भाव से कांग्रेस विधायक दल में विलय किया है और सवाल यह भी कि क्या बिना किसी डील के ही बसपा विधायकों (BSP Mla) ने इतना बड़ा फ़ैसला कर लिया?

प्रदेश में एक बार फिर इतिहास का दोहराव हुआ है. इस दौरान बसपा के पूरे विधायक दल का विलय कांग्रेस विधायक दल में हो गया है. बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों से इस विलय की ज़रूरत पर सवाल किया गया तो उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास की दुहाई दी. लेकिन इस दौरान जब यह पूछा गया कि क्या यह विलय पर्दे के पीछे की किसी डील का नतीजा है तो विधायकों ने किसी भी डील से इंकार किया.

बसपा विधायक अवाना ने क्षेत्र के भलाई की कही बात
बसपा विधायक जोगिंदर सिंह अवाना ने कहा कि कोई मंत्री बनेगा या नहीं और किसे क्या पद मिलेगा इसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot)से कोई बात नहीं हुई. अवाना ने यह भी कहा कि सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से अपने क्षेत्र का भला सोचते हुए यह विलय किया है.

विरोध और समर्थन से था असमंजस
अवाना ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव(Vidhansabha ELections 2018) जीतने के बाद से ही वे लोग सरकार को सदन में समर्थन दे रहे थे. अपने-अपने क्षेत्र में विकास के काम भी करवा रहे थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में उसी सरकार और सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ वोट मांग रहे थे. ऐसे में लोगों में असमंजस की स्थिति बन रही थी.

संगठन नेतृत्व नहीं ले पा रहा था फैसला
अवाना कहते हैं कि इस सिलसिले में उन्होंने बसपा के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से भी बात की थी. लेकिन नेतृत्व कोई फ़ैसला नहीं ले पा रहा था.  उन्होंने कहा कि आगामी निकाय चुनाव और पंचायतीराज चुनाव में कोई गफलत की स्थिति न बने इसलिए उन लोगों ने विधायक दल के विलय का फ़ैसला लिया. 

विलय को लेकर डील के किया इंकार
भरतपुर के नगर से बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले जोगिंदर अवाना विलय को लेकर सरकार के साथ किसी भी तरह की डील से इनकार कर रहे थे. लेकिन इस दौरान वहां मौजूद बीएसपी विधायल दीपचन्द खेरिया से पूरे घटनाक्रम पर सवाल किया गया तो खेरिया ने कहा कि लंबे समय से बातचीत चल रही थी. यह तो तकरीबन डेढ़ महीने पहले ही तय हो गया था कि विलय होना है.

लेकिन फिर...
हालांकि खेरिया के इतना कहते ही अवाना ने उनके स्टेटमेन्ट में सुधार करने की कोशिश भी की. लेकिन खेरिया ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि इस बारे में तो बात काफी समय से चल रही थी. लेकिन बात क्या चल रही थी और सहमति किस पर बनी इस बारे में ज्यादा खुलासा करने से खेरिया ने भी इनकार कर दिया.

प्रदेश में दोहराया 2008 का घटनाक्रम
हालांकि बीएसपी से कांग्रेस में आए विधायक अभी तक कैमरे पर न तो यह मान रहे हैं कि उनकी सरकार से कोई डील हुई है और अगर हुई है तो उसका खुलासा करने के लिए तो कतई तैयार नहीं हैं. लेकिन कुछ इसी तरह का इंकार 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए विलय के दौरान भी देखने को मिला था. इस समय भी बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों का कहना था कि कोई डील नहीं हुई. जबकि बाद में तीन विधायकों को मंत्री और तीन को संसदीय सचिव बनाया गया था. ऐसे में अब भी कुछ इसी तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन छह चेहरों में से कुछ को मन्त्रिमंडल में देखा जा सकता है.