close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

कोलकाताः हड्डियों से लीवर तक पहुंच चुका था कैंसर, डॉक्टरों ने ऐसे दिलवाई मौत पर जीत

सोमा दोलुइ हावड़ा के बागनान इलाके की रहने वाली है और वो एक दुर्लभ लंग कैंसर से ग्रस्त थी जो की चौथे स्टेज पर पहुंच चुका था और मौत से कुछ ही दूरी पर थी. 

कोलकाताः हड्डियों से लीवर तक पहुंच चुका था कैंसर, डॉक्टरों ने ऐसे दिलवाई मौत पर जीत
सोमा के इस बीमारी को डॉक्टरों ने नेवर स्मोकर एशियन यंग लेडी बताया. मरीज़ के ऊपर Crizotinib दवाई का प्रयोग किया गया.

कोलकाता: कोलकाता के मेडिकल कॉलेज डॉक्टर ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. कैंसर जैसी एक घातक बीमारी जिसका नाम सुनते ही इंसान के होश उड़ जाते हैं और उसे अपने इलाज की चिंता शुरू हो जाती है. 

ऐसी स्थिति में मरीज़ को समझ नहीं आता की वो करें तो क्या करें क्योंकि इस बीमारी के इलाज के लिए जितने पैसों की ज़रूरत होती है उसका जुगाड़ कर पाना मरीज़ या उसके परिवार के लिए एक कठिन चुनौती है. एक ऐसे मरीज़ की कहानी जिसने मौत को मात देने के साथ-साथ अब विश्व विख्यात भी होने जा रही है. सोमा दोलुइ हावड़ा के बागनान इलाके की रहने वाली है और वो एक दुर्लभ लंग कैंसर से ग्रस्त थी जो की चौथे स्टेज पर पहुंच चुका था और मौत से कुछ ही दूरी पर थी. उनके ज़िंदा रहने की उम्मीद केवल 3 से 6 महीने ही थी. डॉक्टर भी स्पष्ट कर चुके थे कि जिंदगी अब बचेगी भी तो ज्यादा से ज्यादा एक साल. 

ऐसे लौटी जीवन की उम्मीद
लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ है, जिससे एक उम्मीद लौट आई. एक विशेष प्रकार की दवाई का इस्तेमाल कर सोमा दोलुइ का लंग में बढ़ रहे कैंसर के ट्यूमर को डॉक्टरों ने खत्म कर दिया. डॉक्टर शिवाशीष भट्टाचार्य ने बताया की सोमा का कैंसर हड्डियों से लीवर तक फ़ैल गया था और इसके साथ-साथ इस मामले की केस स्टडी एक विदेश जर्नल में भी छापने की तैयारी चल रही है. कोलकाता मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन ऑन्कोलॉजी विभाग को मिली इस बड़ी सफलता से काफी उम्मीदे हैं.

भावुक कर देगी पूरी कहानी
सोमा के इस बीमारी को डॉक्टरों ने नेवर स्मोकर एशियन यंग लेडी बताया. मरीज़ के ऊपर Crizotinib दवाई का प्रयोग किया गया. जिसमें महीने में डेढ़ लाख का खर्चा आता था. सोमा के पति हेमंत ने बताया की इतने पैसे खर्च करना उनके बस की बात नहीं थी। उसके बाद मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने स्वस्थ्य भवन के साथ बात कर 1 लाख रूपए का इंतेज़ाम कर उससे महंगी दवा खरीदकर उसका इलाज शुरू कर दिया. प्रोफेसर शिवाशीष भट्टाचार्य ने बताया, जब यह लड़की हमारे पास आई इसने कभी भी धूम्रपान या किसी अन्य प्रकार का तम्बाकू सेवन नहीं किया। बहुत ही कम उम्र 35 साल और इसमें जिस तरह का कॉमन लंग कैंसर होता है वैसा नहीं था. 100 में से दो ही लोग ऐसे होते है जिनमे इस तरह का कैंसर पाया जाता है. और यह भी ठीक उसी प्रकार का दुर्लभ लंग कैंसर था क्योंकी हमने उसका BIOPSY किया था और उसका ट्रांसलोकेशन स्टडी किया जिसमे पॉजिटिव पाया गया, इसके बाद दवा का उपयोग किया गया. 

ऐसे शरीर से खत्म किया कैंसर
उस दौरान हमने यह भी पाया की कैंसर मरीज़ के लगभग पूरे शरीर में फ़ैल गया जिसमें हड्डियां और लीवर भी शामिल थे. हमने कीमोथेरेपी की जगह इस दवाई का इस्तेमाल किया और हमने पाया की केवल 3 महीने के इस दवाई के इस्तेमाल से मरीज़ ने काफी इम्प्रूव किया है जिसके पास जीने के लिए 3 से 6 महीने ही थे.हमने पाया की 60 प्रतिशत कैंसर कम हो गया. हमने इस विषय को लेकर कैंसर बोर्ड से बातचीत भी की और बताया की इलाज में 4,5 लाख रूपए खर्च हो चुके है और इतनी ही रकम और चाहिए. इसके बाद हमारे MSPV  ने विषय को ज़रूरी समझते हुए उचित व्यवस्था की और 6 महीने तक हमने PET CT स्कैन किया कोलकाता के NRS अस्पताल में जो की बिलकुल मुफ्त होता और इसमें हमने पाया की एक भी कैंसर का लक्षण मजूद नहीं है. उन्होंने कहा अभी भी हम उसको दवाई दे रहे है जब तक मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता. मेरे लिए यह चमत्कार से कम नहीं है और इस घटना को हम लोग एक विदेशी जर्नल में छापने भी जा रहे है. अभी मरीज़ स्वस्थ है और अपने परिवार के साथ है.