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कोटा: नए अस्पताल में जल्द लगेगा ब्लड कम्पोनेंट सेपरेटर, लोगों नहीं जाना पड़ेगा MBS होस्पिटल

ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग कर देती है. मशीन के लगने से एक ही ब्लड को चार तरह लिया जा सकता है. 

कोटा: नए अस्पताल में जल्द लगेगा ब्लड कम्पोनेंट सेपरेटर, लोगों नहीं जाना पड़ेगा MBS होस्पिटल
नए अस्पताल के ब्लड बैंक में सालाना करीब 8 हजार यूनिट रक्त संग्रहित होता है.

कोटा/ मुकेश सोनी: मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध, नए अस्पताल के ब्लड बैंक में जल्द ही कम्पोनेंट सेपरेटर मशीन स्टॉल होगी. करीब 1 करोड़ की लागत वाली 8 उच्च स्तरीय मशीन नए अस्पताल के ब्लड बैंक के लिए खरीदी जा चुकी है. ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से लाइसेंस जारी होने के बाद इन्हें शुरू किया जाएगा. इसके शुरू होने से डेंगू, किडनी, लीवर, डायलिसिस, थैलीसीमिया से पीड़ित मरीजो को फायदा होगा. उन्हें इलाज के 15 किलोमीटर दूर एमबीएस अस्पताल नही जाना पड़ेगा. उनके पैसे और समय की बचत होगी.

खून में शामिल चार तत्वों को अलग करती है मशीन 
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग कर देती है. मशीन के लगने से एक ही ब्लड को चार तरह लिया जा सकता है. ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाजमा और एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है. 

यह मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाजमा, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी) को अलग कर देता है. ऐसे में मरीज को पूरी बोतल खून चढ़ाने के बजाए आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं. एक बोतल खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है. सेपरेटर मशीन के लग जाने से ब्लड ट्रांसफ्यूजन के क्रम में होनेवाली रीएक्शन की आशंका कम हो जाती है.

सुपर स्पेशयलिटी सुविधा को मिलेगी मजबूती
नए अस्पताल परिसर में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनकर तैयार है. डेंगू,किडनी,लीवर,डायलिसिस ,थैलीसीमिया से पीड़ित मरीज अभी भी यहाँ से 15 किलोमीटर दूर एमबीएस अस्पताल के ब्लड बैंक के भरोसे इलाज के लिए मजबूर हैं. नए अस्पताल में कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की कमी महसूस होने लगी थी.

नए अस्पताल के ब्लड बैंक में सालाना करीब 8 हजार यूनिट रक्त संग्रहित होता है. जबकि एमबीएस स्थित ब्लड बैंक में सालाना करीब 25 हजार यूनिट रक्त संग्रहित होता है. ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन हैड डॉ. एचएल मीणा ने बताया कि विभाग की तरफ से पूरी तैयारी करके फाइल भेजी है. ड्रग कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया की टीम सर्वे करने आएगी. उसके बाद लाइसेंस मिलने पर नए अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन को शुरू किया जाएगा.